मुकेश केजरीवाल, नई दिल्‍ली। आयुर्वेद सहित सभी तरह की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिहाज से जल्द ही एक अहम प्रगति होने वाली है। दुनिया भर में किसी भी हिस्से में मौजूद चिकित्सकीय महत्व वाले वनस्पतियों का पहला व्यापक इनसाइक्लोपीडिया भारत में तैयार हो रहा है।

पतंजलि विश्वविद्यालय का दावा है कि इसमें पहली बार 54 हजार तरह की वनस्पतियों का पूरा ब्योरा और उनका चिकित्सकीय उपयोग वैज्ञानिक तरीके से एक जगह उपलब्ध हो सकेगा।

पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण 'नईदुनिया' के सहयोगी प्रकाशन 'दैनिक जागरण' से बातचीत में कहते हैं, "आयुर्वेद ही नहीं दुनिया भर की पांच दर्जन से ज्यादा प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की विश्वसनीयता बढ़ाने और इन्हें ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि इन्हें बनाने का तरीका प्रामाणिक हो।

अभी भारत में ऐसी दवाएं बनाने वाली सभी फार्मेसी कंपनियां कुल मिलाकर भी तीन सौ से कम जड़ी-बूटियों का प्रयोग करती हैं। इसलिए पतंजलि विश्वविद्यालय की ओर से यह परियोजना शुरू की गई।" अनुमान है कि दुनिया भर में कुल 4.5 लाख तरह की वनस्पतियां हैं। इनमें से लगभग 55 हजार औषधीय गुणों से युक्त हैं। इनमें से 15 से 20 हजार सिर्फ भारत में ही उपलब्ध हैं।

आचार्य बालकृष्ण दावा करते हैं कि अगले तीन साल के अंदर यह काम पूरा कर लिया जाएगा। ये बताते हैं कि इनसाइक्लोपीडिया में वनस्पतियों के विभिन्न भाषाओं में मौजूद नाम, वानस्पतिक नाम, उत्पत्ति, कुल आदि सारे ब्योरे उपलब्ध होंगे। इसकी मदद से पौधों की पहचान की जा सकेगी और उनके गुणों को समझा जा सकेगा। इसके लिए उनके रासायनिक संघटन और औषधीय गुण-धर्म के साथ उसके प्रचलित प्रयोग भी दर्ज किए जा रहे हैं।

अभी कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन की ओर से ऐसे इनसाइक्लोपीडिया उपलब्ध तो हैं, लेकिन उनमें बहुत सीमित वनस्पतियों की जानकारी है और साथ ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिहाज से उसकी महत्ता पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है।

उधर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का भी मानना है कि खास तौर पर भारत जैसे विकासशील देशों के लिए वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। क्योंकि सिर्फ एलोपैथी की मदद से सभी को जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाने में देश को कई दशक लग सकते हैं।