कुंभनगर। वसंत पंचमी का शाही स्नान करने के बाद किन्नर अखाड़ा ने अपना विस्तार करते हुए चार नए महामंडलेश्वर व एक पीठाधीश्वर बनाया। सेक्टर 12 स्थित अखाड़ा के शिविर में मंत्रोच्चार के बीच पूजन करने के बाद संन्यासियों का पट्टाभिषेक किया गया।

मुंबई की डॉ. राजराजेश्वरी शिवप्रिया, जयपुर की पुष्पा माई, असम की गायत्री, नासिक की पायल मां महामंडलेश्वर बनीं। जबकि, हरियाणा की आशा मां को पीठाधीश्वर बनाया गया। महात्माओं ने माल्यार्पण कर चादर ओढ़ाकर महामंडलेश्वर बनने की शुभकामना दी। साथ ही सनातन धर्म का संरक्षण, प्रचार-प्रसार बिना किसी स्वार्थ के करने का संकल्प दिलाया।

अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि सनातन धर्म व सामाजिक उत्थान किन्नर अखाड़ा का मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए अखाड़ा का विस्तार किया जा रहा है। नए महामंडलेश्वर व पीठाधीश्वर पूरे समर्पण से अपना काम करेंगे। सनातन धर्म के मर्म से लोगों को जोड़ेंगे। कहा कि धर्म व राष्ट्रहित में अखाड़ा का विस्तार आगे भी किया जाएगा।

अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के महामंत्री स्वामी ब्रह्माश्रम ने कहा कि धर्म व समाज में उपेक्षित रहे किन्नरों की स्वीकार्यता बढ़ी है। किन्नर अखाड़ा का विस्तार होने से हर किन्नर के जीवन में चामत्कारिक बदलाव आएगा। दिगंबर अनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर सरयूदास त्यागी ने कहा कि किन्नर अखाड़ा का विस्तार धर्महित में अच्छा संकेत है। इससे किन्नरों की स्वीकार्यता जन-जन में बढ़ेगी।

महंत माधव दास बने निर्मोही अखाड़ा के महामंडलेश्वर

गंगेश्वर सेवा सदन आश्रम उत्तरकाशी खालसा के श्रीमहंत माधवदास महात्यागी को निर्मोही अखाड़ा का नया महामंडलेश्वर बनाया गया। निर्मोही अनी अखाड़ा के शिविर में सोमवार को मुखिया श्रीमहंत राजेंद्र दास के नेतृत्व में माधवदास का विधि-विधान से पट्टाभिषेक कराया गया। पूजन कराने के बाद महात्माओं ने माल्यार्पण कर चादर ओढ़ाई। इस दौरान श्रीमहंत रामजी दास, नरेंद्र दास, भगवान दास, महेश दास, श्रीमहंत दिलीप दास, महेंद्र भाई झा मौजूद रहे। श्रीमहंत राजेंद्र दास ने बताया कि कुंभ मेले में अब तक तीनों वैष्णव अनी अखाड़ा में 32 महामंडलेश्वर बनाए गए हैं।