मुंबई। मुंबई की विशेष एनआइए अदालत ने भगोड़े इस्लामी प्रचारक डॉ.जाकिर नाईक की चार संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया है।

पिछले वर्ष जून में इस्लामी प्रचारक को भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद ही जांच एजेंसी ने मुंबई के मझगांव में स्थित उसकी चार अचल संपत्तियां जब्त करने की अनुमति कोर्ट से मांगी थी।

इन संपत्तियों में जास्मीन अपार्टमेंट के दो फ्लैट, मारिया हाइट्स इमारत में एक फ्लैट एवं क्रिस्टल अपार्टमेंट में एक दुकान शामिल है।

संपत्ति जब्त करने की सिफारिश करते हुए एनआइए के वकील आनंद सुखदेव ने अदालत को बताया था कि नाईक पर गैरकानूनी गतिविधि (निरोधक) कानून (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज होने के बाद विभिन्ना स्त्रोतों से होने वाली

उसकी आमदनी बंद हो गई है। विदेश में अपना खर्च चलाने के लिए वह इन संपत्तियों को बेचना चाहता है। इसलिए इन संपत्तियों को जब्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

डॉ. नाईक के वकील अमीन सोलकर ने अभियोजन पक्ष के वकील की दलीलों का विरोध किया था। लेकिन अदालत ने उनके विरोध को दरकिनार करते हुए कहा कि एक ऐसा आरोपित जिसके विरुद्ध गैरजमानती वारंट हो और जिसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका हो, उसे सिर्फ वकील के जरिये सुनने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

बता दें कि दो साल पहले बांग्लादेश में विस्फोट के बाद पकड़े गए आरोपितों में से एक ने जाकिर नाईक के प्रवचनों से प्रभावित होने की बात कही थी।

उसके बाद ही नाईक के संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था।

एनआइए का आरोप है कि डॉ. नाईक अपने भाषणों के जरिये दो समुदायों में वैमनस्य फैला रहा है। साथ ही वह भारत और भारत के बाहर मुस्लिम युवकों को आतंकवाद की ओर प्रेरित करने का भी काम करता है।