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    कठुआ केसः कोर्ट में बोले आरोपी- नार्को टेस्ट के लिए तैयार, अगली सुनवाई 28 अप्रैल को

    Published: Mon, 16 Apr 2018 07:28 AM (IST) | Updated: Mon, 16 Apr 2018 12:34 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    कठुआ-जम्मू। बहुचर्चित रसाना मामले की सुनवाई अब 28 अप्रैल को सेशन कोर्ट कठुआ में होगी। सोमवार को चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट कठुआ ने दोनो पक्षों को सुनने के बाद मामले की सुनवाई सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दी। इस दौरान मुख्य आरोपी सांझी राम ने कोर्ट में चिल्ला कर नारको टेस्ट करवाने की मांग की।

    इससे पहले सोमवार सुबह दस बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस सभी आठ आरोपियों को चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में ले आई। सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश हुए वकीलों एके साहनी, अंकुर शर्मा ने कहा कि अभी तक आरोपियों को क्राइम ब्रांच की ओर से पेश की गई चार्ज शीट की कापी तक नहीं दी गई है। उन्होंने मामले की सुनवाई 28 अप्रैल करने का विरोध करते हुए कहा कि चार्जशीट चार सौ से अधिक पन्नों की है। इसे पढ़ने के लिए भी समय चाहिए। इसमें कई कमियां हैं।

    वकीलों ने यह भी कहा इसमें 239 गवाह हैं और इन्हें पेश करने में ही काफी समय लग जाएगा। ऐसे में फास्ट टै्रक कोर्ट में नब्बे दिन में सुनवाई करना संभव नहीं है। इस दौरान कोर्ट में मौजूद आरोपी सांझी राम ने सभी आरोपियों के नारको टेस्ट करवाने की भी मांग की। चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट अजीत सिंह ने आरोपियों की ओर से मौजूद वकीलों को सुनने के बाद इस मामले की सुनवाई सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दी। सेशन कोर्ट में अब 28 अप्रैल को सुनवाई होगी।

    करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के दौरान कोर्ट लोगों और मीडिया से खचाखच भरा हुआ था। इस दौरान सभी आठ आरोपी सांझी राम, नाबालिग आरोपित, परवेश, विशाल शर्मा, सुरेंद्र वर्मा, दीपक खजूरिया, तिलक राज और आनंद दत्ता मौजूद थे।

    बता दें कि इस मामले की जांच के दौरान जो साक्ष्य पुलिस क्राइम ब्रांच ने जुटाए हैं उनसे साफ हो गया है कि आरोपितों ने हत्या से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट कर दिए।

    मुख्य आरोपित सांझी राम ने बेटे को बचाने के लिए मेरठ विश्वविद्यालय प्रबंधन को ही नहीं खरीदा, हीरानगर पुलिस स्टेशन में तैनात हेड कांस्टेबल तिलक राज, विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) दीपक खजूरिया व सुरेंद्र कुमार को भी विश्वास में लिया। यह खुलासा क्राइम ब्रांच ने अपनी चार्जशीट में किया है।

    चार्जशीट में कहा गया है कि जब बच्ची का शव 17 जनवरी को हीरानगर पुलिस स्टेशन लाया गया तो उसके कपड़े कीचड़ से सने हुए थे। कपड़ों पर खून के भी निशान थे। इस मामले में चालान पेश करने के बाद सोमवार को कठुआ जिला न्यायालय में पहली सुनवाई होगी।

    हेड कांस्टेबल ने धोए कपड़े

    एसपीओ दीपक खजूरिया ने गवाही में कहा कि हीरानगर थाने में तैनात हेड कांस्टेबल तिलक राज को बच्ची के कपड़ों को धोते हुए देखा था। चूंकि कपड़े धो दिए गए थे इसलिए जम्मू फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) को कपड़ों पर कीचड़ और खून नहीं मिला।

    डीएनए टेस्ट में बाल की पुष्टि

    सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि के लिए वेजेनाइल स्वैब श्रीनगर एफएसएल भेजा गया तो वहां भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला। सबूत की तलाश में स्वैब डीएनए टेस्ट के लिए दिल्ली की एफएसएल भेजा गया और देवस्थान से मिले बालों के डीएनए टेस्ट से वेजेनाइल स्वैब का डीएनए टेस्ट क्रॉस मैच कराया गया तो पता चला कि बाल बच्ची के ही हैं। डीएनए प्रोफाइल से कई सुराग मिले जिसमें दुष्कर्म के साक्ष्य भी सामने आए।

    विवि प्रबंधन को खरीदा

    मुख्य आरोपित सांझी राम ने बेटे विशाल को दुष्कर्म और हत्या के मामले में फंसते देख मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय प्रबंधन को भी खरीद लिया। बेटा कठुआ के रसाना में मासूम की आबरू लूटता रहा और उसके बदले मेरठ में बीएससी एग्रीकल्चर के पेपर कोई दूसरा युवक दे रहा था। विशाल जानबूझकर अपना मोबाइल मेरठ छोड़ कर आया था, ताकि कॉल डिटेल में उसकी लोकेशन मेरठ में दिखे। इतना ही नहीं मेरठ में मोबाइल पर फोन भी रिसीव किए गए ताकि जांच को गुमराह किया जा सके। आरोपित विशाल ने अपना एटीएम कार्ड भी मेरठ में ही रखा था और उस कार्ड से भी किसी ने पैसे निकाले ताकि इसे साक्ष्य बनाया जा सके।

    नशीली गोलियां खिलाई

    दूसरे आरोपित शुभम (सांझी राम का भतीजा) को बचाने के लिए उसके स्कूल रिकॉर्ड में उसकी उम्र भी कम लिखाई गई। लेकिन, जम्मू राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा गठित डॉक्टरों के बोर्ड की जांच से पता चला कि वह नाबालिग नहीं है। शुभम ने लड़की की आबरू लूटने से पहले उसे नशे की गोलियां खिलाईं और फिर उसे देवस्थान में लाया।

    पुलिस को दी गई रिश्वत

    शुभम और विशाल को फंसते देख सांझी राम ने पुलिस को रिश्वत दी। दीपक और सुरेंद्र जो रसाना के रहने वाले हैं, ने भी लड़की की आबरू लूटी और सांझी राम के बेटे विशाल को भी इस गंदगी में फंसा लिया। लड़की से छुटकारा पाने के लिए उसकी मौत की कहानी 17 जनवरी को लिखी गई। उसे बेहोशी ही हालत में देवस्थान के पास पुलिया के नीचे लाया गया जहां पीठ पर लात रखकर दुपट्टे से गला घोंट दिया। बाद में पत्थर से कुचल कर शव झाड़ियों में फेंक दिया।

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