सतीश चंदन, ऊना : हर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़े और एक कामयाब इंसान बनकर नाम रोशन करे। इसके लिए ज्यादातर माता-पिता अच्छे निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए पूरा जोर लगा देते हैं। लेकिन हिमाचल के ऊना जिले में एक ऐसा सरकारी स्कूल है जो निजी स्कूलों की सुविधाओं को धता बताकर अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी ओर खींच रहा है।

जी हां, हरोली विस क्षेत्र की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कांगड़ निजी स्कूलों को मात दे रही है। ऐसे में अभिभावक अब निजी स्कूलों से बच्चों को निकाल कर इस सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं।

26 बच्चों ने छोड़े निजी स्कूल : 2018 में करीब 26 बच्चों ने निजी स्कूल छोड़कर कांगड़ स्कूल में एडमिशन लिया। इनमें छठी से आठवीं क्लास तक के बच्चे शामिल हैं। ऐसे में यह स्कूल दूसरे सरकारी स्कूलों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गया है। इसके पीछे सरकारी शिक्षकों की मेहनत है।

दीवारें बांट रही ज्ञान : स्कूल के क्लास रूम हाईटेक तरीके तैयार किए गए हैं। एक क्लास रूम में तो सौर मंडल इस प्रकार से दर्शाया गया है कि स्कूल की छत पर सारा आसमान नजर आ रहा है। ऐसे में बच्चों को क्लास रूम में खेल-खेल में पढ़ने का मौका मिलता है। स्कूल की दीवारों पर टेंस का चार्ट लगाया गया है। इससे बच्चों को अंग्रेजी सीखने में दिक्कत नहीं आती। प्रभारी जोगिंद्र कौशल के प्रयास से ईको क्लब बनाया गया है। क्लब में इस समय 65 बच्चे हैं।

स्कूल में क्या है विशेष : कांगड़ स्कूल में कैक्टस वाटिका, मेडिसन वाटिका, नेचर फिलिंग हट और किचन गार्डन हैं। ईको क्लास रूम बनाया गया है, जिसमें प्रकृति को संजोया गया है। स्कूल राष्ट्रीय आविष्कार योजना के लिए चयनित है। स्कूल में साइंस पार्क है। अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई भी करवाई जा रही है। सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

कांगड़ स्कूल के शिक्षकों की मेहनत रंग ला रही है। निजी स्कूलों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए लौट रहे हैं। 2017 में छठी से आठवीं के बच्चों की संख्या 135 थी। जो कि 2018 में 161 तक पहुंच गई है। स्कूल में जमा दो तक 315 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। -सतीश शर्मा, प्रधानाचार्य कांगड़ स्कूल