नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में गृह मंत्रालय ने जानकारी दी है कि असम राइफल पर दोहरे नियंत्रण को लेकर सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट कमेटी (CCS) का फैसला गृह और रक्षा मंत्रालय दोनों को मान्य होगा। दिल्ली हाई कोर्ट को दिए गए शपथपत्र में गृह मंत्रालय ने यह भी कहा है कि इस संबंध में केंद्रीय गृह सचिव ने 4 अप्रैल को रक्षा सचिव के साथ बैठक की थी। इसमें गृह मंत्रालय द्वारा 20 मार्च को CCS के सामने भेजे गए नोट को लेकर चर्चा हुई थी।

184 साल पुराने अर्धसैनिक बल असम राइफल पर प्रशासनिक नियंत्रण केंद्रीय गृह मंत्रालय का और संचालन नियंत्रण रक्षा मंत्रालय का होता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले CCS में विदेश मंत्री, गृह मंत्री, वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री शामिल होते हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि कोर्ट अब कैबिनेट सचिव को नोटिस जारी कर यह जानेगी कि गृह मंत्रालय द्वारा भेजे गए नोट पर CCS ने क्या फैसला लिया। दिल्ली हाई कोर्ट असम राइफल के पूर्व सैनिकों के संगठन की पिटीशन पर सुनवाई कर रहा है।


संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्त होने वाले फौजियों को अर्धसैनिक बल पर दोहरे नियंत्रण के चलते पेंशन को लेकर दिक्कत होती है। असम राइफल का गठन साल 1835 में हुआ था। तब उसमें सिर्फ 750 जवान थे और उसका काम सिर्फ असम के चाय बागानों और उनकी संपत्तियों की आदिवासियों के हमले से रक्षा करना था।

बाद में उसका आकार और काम का दायरा भी बढ़ा और उसे अविभाजित असम की सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात कर दिया गया। मौजूदा समय में असम राइफल्स की 46 बटालियन हैं और इसके फौजियों की संख्या लगभग 46,000 है।