नई दिल्ली। राफेल मुद्दे को लेकर बुधवार को लोकसभा में बहस जारी है और इसकी शुरुआत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर सौदे में धांधली के आरोप लगाते हुए सरकार से सवाल पूछे। वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इन आरोपों का जवाब दिया और जेपीसी की मांग से इनकारकर दिया।

सदन में चर्चा की शुरुआत राहुल गांधी ने की और इस दौरान उन्होंने सदन में कंग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा जारी किए गए ऑडियो टेप को सुनाने की मांग की जिसका सत्ता पक्ष ने जमकर विरोध किया साथ ही लोकसभा स्पीकर ने भी राहुल गांधी को टेप चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद अरुण जेटली ने राहुल गांधी के आरोपो पर पलटवार करते हुए उन्हें झूठा करार दे दिया।

सदन में बहस के दौरान जेटली के बायन पर विपक्षी दल हंगामा करने लगे और किसी ने कागज के हवाई जहाज उड़ाए। लगातार हो रहे हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।

जेटली ने कहा कांग्रेस को केवल पैसे का गणित समझ आता है

सदन में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कांग्रेस की इस मामले में जेपीसी की मांग ठुकराते हुए इससे पूरी तरह इनकार कर दिया। जेटली ने कहा कि राफेल पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दे दिया है। कांग्रेस जो कीमत का मुद्दा उठा रही है उसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय जिन विमानों का सौदा हुआ था उनमें हथियार नहीं थे जबकि वर्तमान सौदे पर हथियारों से लेस विमानों का सौदा हुआ है जो यूपीए शासन के दामों से 20 प्रतिशत कम पर हुआ है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा नेता अरुण जेटली ने ऑडियो टेप को लेकर राहुल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी झूठा टेप लेकर आाते हैं और सदन में सुनाने की अनुमति मांगते हैं लेकिन उसे प्रमाणित करने से घबराते हैं क्योंकि उन्हें पता है यह टेप उनकी पार्टी द्वारा फर्जी तरीके बनाई गई है।

जेटली आगे बोले कि पिछली बार राहुल गांधी ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के बयान को अपने तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश किया, आज उन्होंने फिर से वही सब किया है। उन्होंने एक टेप चलाना चाहा लेकिन उसे प्रमाणित करने से डर रहे हैं।

जेटली ने कहा कि राहुल गांधी ने जो भी कहा है वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। कांग्रेस सच को नकार रही है।

जेटली ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए बोफोर्स, अगस्ता जैसे घोटालों का जिक्र करते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड एक परिवार की प्रॉपर्टी हो गया। इस देश में कुछ ऐसे परिवार हैं जिन्हें केवल पैसे का गणित समझ आता है देश की सुरक्षा का नहीं। राहुल गांधी को लड़ाकू विमानों की समझ नहीं है।

जेटली ने आगे कहा कि जब आप पर अगस्ता, बोफोर्स और नेशनल हेराल्ड को लेकर उंगलियां उठ रही हैं तो यह बहुत ज्यादा है। जब एक परिवार का नाम तीन-तीन घोटालों में आ रहा है तो वो हम पर आरोप लगाने का साहस कर रहा है।

राहुल को नहीं मिली अनुमति

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि अगर इस टेप की प्रामाणिकता का पता नहीं है और अगर राहुल गांधी इसे प्रामाणित नहीं करते तो इसे चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही जब राहुल इसकी स्क्रीप्ट पढ़ने की अनुमति मांगी लेकिन स्पीकर ने उससे भी नियमों का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया।

राहुल के इनकार करते ही भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने निशाना साधते हुए कहा कि अगर इस टेप में सच्चाई है तो राहुल इसे प्रमाणित करें और अगर वो ऐसा नहीं करते तो इसका मतलब है कि वो देश को झूठी टेप सुनाकर धोखा दे रहे हैं।

संसद में हंगामे के चलते स्पीकर ने कार्यवाही 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी है। सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने के बाद राहुल ने स्पीकर की बात मानते हुए टेप तो नहीं चलाया लेकिन यह जिक्र जरूर किया कि ऑडियो टेप में एक मंत्री यह दावा कर रहा है कि राफेल से जुड़ी फाइलें मनोहर पर्रिकर के फ्लैट में हैं। राहुल गांधी ने कहा कि हम इस सौदे की जेपीसी से जांच की मांग करते हैं।

इससे पहले राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि एआईएडीएमके के सांसद सरकार का समर्थन कर रहे हैं यह दुखद है। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि किसी ने उन पर आरोप नहीं लगाया। ये सच नहीं है। पूरा देश इसे लेकर सवाल कर रहा है।

राहुल आगे बोले कि राफेल डील के तीन स्तंभ हैं, पहला प्रक्रिया, दूसरा कीमत और तीसरा संरक्षण। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने लंबी बातचीत के बाद सौदा तय किया और उन्हें 126 विमान चाहि थे। तो फिर यह 36 पर क्यों आ गया? किस व्यक्ति ने सेना की जरूरत को बदला है?

राहुल गांधी ने एक बार फिर से आरोप लगाया कि फ्रांस जाकर प्रधानमंत्री ने डील बदली है। उन्होंने सवाल पूछे कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक बयान में स्पष्ट रूप से क्यों कहा कि पीएम ने उनसे कहा है कि वो उनकी तरफ से श्री अंबानी को चुनें? सरकारी खजाने पर 30,000 करोड़ का बोझ डालकर पीएम के मित्र श्री अनिल अंबानी को ठेका क्यों दिया गया?