नई दिल्ली। देश में बालाकोट एयर स्ट्राइक को लेकर भले ही सियासत गरमाई रही हो, लेकिन भारतीय वायुसेना प्रमुख का मानना है कि भारत के पास तकनीक के साथ राफेल विमान होता तो नतीजे और भी बेहतर होते। भारतीय वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने सोमवार को भविष्य की एयरोस्पेस शक्ति और प्रौद्योगिकी के प्रभाव पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि बालाकोट हवाई हमलों के दौरान भारत के पक्ष में तकनीक थी, लेकिन वक्त पर राफेल लड़ाकू विमान मिल जाते तो परिणाम देश के पक्ष में और बेहतर होता।

एयर चीफ ने कहा कि बालाकोट अभियान के वक्त इस्तेमाल हुई प्रौद्योगिकी पड़ोसी देश से ज्यादा समृद्ध थी और यही वजह रही कि हम बड़े सटीक ढंग से हथियारों का इस्तेमाल कर सके। इसका एक कारण यह भी रहा कि हम मिग-21, बाइसन और मिराज-2000 विमानों को उन्नत बनाने में कामयाब रहे। धनोआ ने कहा अगर हमें समय पर राफेल विमान मिल गए होते तो इस हमले के परिणाम हमारे पक्ष में और अधिक होते।

धनोआ ने अपने भाषण में कहा कि अगर दो से चार सालों के दौरान राफेल और एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली एयरफोर्स में शामिल कर ली जाती है तो तकनीकी क्षमता में हमारा पक्ष मजबूत होगा। यह ठीक उसी तरह होगा जैसे 2002 में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान था।

धनोआ ने कहा कि सेना के पास जो भी हथियार मौजूद हैं उनका तकनीकी तौर पर उन्नत होना जरूरी है। थल सेना में जहां सैनिकों की संख्या की सबसे अहम भूमिका होती है वहीं नौसेना और वायुसेना के सैनिक अत्यधिक तापमान और दबाव की स्थितियों में मशीनों से युद्ध करते हैं। ऐसे वक्त में एयरफोर्स के साजोसमान में होने वाले तकनीकी बदलाव अधिक संवेदनशील होते हैं।

यह सेमिनार दिवंगत एयर मार्शल अर्जन सिंह के जन्म शताब्दी अवसर पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मेजबानी भारतीय वायुसेना और स्वायत्त रक्षा अनुसंधान और विश्लेषण संस्था सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज (सीएपीएस) द्वारा की गई।