नई दिल्ली। अनगिनत कोशिकाओं से बने इंसानों और अन्य जीवों के शरीर में कोशिकाओं के क्षय की नैसर्गिक प्रक्रिया ही उम्रदराज होने की स्थिति में ले जाती है।

कोशिकाओं के नुकसान की रफ्तार को कम करके बुढ़ापे की अवस्था को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। लेकिन कैसे? इसका उपाय खोजा है, बेंगलूरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के शोधकर्ताओं ने। इनके शोध के मुताबिक वैनेडिया (वैनेडियम ऑक्साइड) के नैनोवायर्स मानव शरीर में कोशिकाओं के नुकसान को कम कर सकते हैं।

वैनेडिया तत्वों की सूची (पीरियोडिक टेबल) में शामिल वी सिंबल वाले तत्व वैनेडियम का एक रूप है। इस खोज से बुढ़ापे, हृदय संबंधी समस्याओं और पार्किंसन व अल्जाइमर्स जैसी कई बीमारियों के इलाज के लिए दवाएं विकसित करने में मदद मिलेगी।

शोध के मुताबिक सामान्य कोशिकीय उपापचय (मेटाबोलिज्म) की प्रक्रिया में रेडियोएक्टिव ऑक्सीजन स्पीसीज (आरओएस) का उत्सर्जन होता है। जब आरओएस का स्तर बढ़ जाता है तब कोशिकाओं के ऑक्सीडेशन संबंधी प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे कोशिका के प्रोटीन, चर्बी, एसिड, डीएनए व अन्य अवयवों का क्षय होता है।

इसलिए होती हैं तमाम बीमारियां

इसके कारण मानव शरीर में समय से पहले बालों के भूरे पड़ने से लेकर कैंसर, मधुमेह, अर्थराइटिस, बुढ़ापे और किडनी सबंधी समस्याओं जैसी विभिन्न बीमारियां पैदा होती हैं। इस शोधकार्य का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर जी मुगेश और पेट्रिक डिसिल्वा ने कहा कि आरओएस को नियंत्रित करने वाली कई एंटीऑक्सीडेंट आधारित दवाएं स्वयं कुछ मात्रा में आरओएस का उत्सर्जन करती हैं।

इसके चलते हमने नैसर्गिक उपाय के जरिये इस नुकसानदेह पदार्थ को कम करने का तरीका तलाशने पर ध्यान केंद्रित किया। जर्नल "नेचर कम्यूनिकेशंस" में इस शोध के संबंध में जानकारी प्रकाशित की गई है।