दीपक बहल, अंबाला। सरहद पर दुश्मन के सामने सीना ताने खड़े सेना के जवानों और अफसरों के लिए रेलवे ने डिफेंस डिपार्टमेंट कोटा (DDQ) देने के लिए हाथ आगे बढ़ाया हैं। आर्मी की बढ़ती मूवमेंट को लेकर अब रेलवे के प्रिंसिपल चीफ कामर्शियल मैनेजर (PCCM) ही तय करेंगे किस राज्य में कोटा दिया जाए। रेल मंत्रालय ने इस बारे में देश भर के अधिकारियों को सर्कुलर जारी कर दिया है।

रेलवे ने अपनी पॉलिसी में बदलाव करते हुए फैसला लिया है कि जिन ट्रेनों में 90 फीसदी से ज्यादा सीटें बुक हैं, वहां पर जरूरत के मुताबिक कोटा दिया जाए। इस निर्णय से सेना को बड़ी राहत मिलेगी। क्योंकि सेना की हमेशा डिमांड रहती है कि ट्रेनों में सेना के लिए सीटों का कोटा बढ़ाया जाए।

15 मार्च 2015 को रेल मंत्रालय ने आदेश जारी कर कहा था कि यदि पिछले वित्त वर्ष के दौरान सामान्य कोटे का 90 फीसदी से ज्यादा उपयोग हो तो रक्षा विभाग को कोई कोटा जारी नहीं किया जाना चाहिए। अगर 90 फीसदी से कम कोटा उपयोग हो और सामान्य आरक्षण कोटे की उपलब्धता पर असर न पड़े, तभी कोटा दिया जाए। इन आदेशों के बाद सेना के लिए डीडी कोटा लेना मुश्किल पड़ गया, क्योंकि रेलवे में अधिकांश ट्रेनों में सीटें फुल होती थीं।

देश में कैंट रेलवे स्टेशनों पर मूवमेंट कंट्रोल ऑफिस खुले हुए हैं। इन्हीं ऑफिस के माध्यम से जवान और अधिकारी रेलवे से कोटे की डिमांड करते हैं। डिमांड के बावजूद कोटा न मिलने के मामले बढ़ते गए। ऐसे हालात में सेना के आला अधिकारियों ने रेलवे के उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया। मामला मंत्रालय से जुड़ा होने की वजह से रक्षा और रेल मंत्रालय के बीच पत्राचार जारी रहा।

31 जनवरी 2019 को रेल मंत्रालय ने पुराने सर्कुलर का जिक्र करते आदेश जारी किए कि अगर जोन को लगता है कि कोटा दिया जाना चाहिए तो इसके लिए PCCM को शक्तियां दी गई हैं। अब PCCM को किस-किस ट्रेन में डीडी कोटा बढ़ाना है, इसका फैसला वह खुद कर सकेंगे।

जोन और बोर्ड के बीच लटक जाती थी फाइल

पहले सेना का कोटा बढ़ाने और घटाने की शक्तियां रेल मंत्रालय के अधीन थी। ऐसे में कोटे को लेकर जोन और रेलवे बोर्ड के बीच पत्राचार होता तो फैसला लेने तक काफी वक्त लग जाता था। ऐसे में रेलवे ने जोन को शक्तियां देकर सेना और रेलवे अफसरों को राहत दी है।