नवीन नवाज, जम्मू। आतंक के गढ़ रहे शोपियां में 14 साल का निहत्था जांबाज इरफान रमजान शेख घर पर हमला करने आए हथियारबंद आतंकियों से न केवल भिड़ गया बल्कि उनकी बंदूक छीनकर एक आतंकी को मौत के घाट भी उतार दिया। अपने भाई-बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों की रक्षा करने वाले इरफान का यह रूप देखकर आतंकी वहां से भाग निकले। हालांकि इस हमले में उसके पिता की मौत हो गई।

आतंक के गढ़ में रहकर उनके लिए खौफ का पर्याय बने इरफान को अब दो साल बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में शौर्य चक्र से सम्मानित किया। बहुत ही कम मामले ऐसे हैं, जब आम नागरिक को इस तरह के वीरता पुरस्कार मिले हैं। परिजनों के अनुसार, इरफान को काफी मलाल रहा कि वह अपने पिता को नहीं बचा सका पर इस बात का सुकून भी कि उसने उनकी मौत का बदला ले लिया।

शोपियां का रहने वाला इरफान अहमद शेख 17 साल का है। उसके तीन छोटे भाई-बहन और एक चचेरा भाई भी है। उसके पिता मोहम्मद रमजान शेख पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के हल्का प्रधान और गांव के पूर्व सरंपच थे। मोहम्मद रमजान शेख 2013 में भी एक आतंकी हमले में बाल-बाल बच गए थे।

क्या हुआ था 16 अक्टूबर 2017 की रात

परिजनों के अनुसार, होमनू गांव निवासी इमरान के पिता मोहम्मद रमजान शेख अपने परिवार के साथ घर में टीवी देख रहे थे। अचानक एक फोन आया। फोन करने वाले ने कहा, बाहर छह मेहमान खड़े हैं, दरवाजा खोलो। मोहम्मद रमजान शेख ने जैसे ही दरवाजा खोला, बाहर हिजबुल मुजाहिदीन के छह आतंकी थे। तीन आतंकी अंदर घुस आए और उन्होंने रमजान को पकड़ लिया।

इसी दौरान पास ही खड़ा इरफान आतंकियों से उलझ पड़ा। घर के अन्य लोग भी आतंकियों का प्रतिरोध करने लगे। इस दौरान एक आतंकी ने गोली चला दी जो रमजान शेख को लगी। इरफान ने आव देखा न ताव, एक आतंकी की राइफल छीन ली और गोली चला दी। इसमें एक आतंकी मारा गया। इमरान का यह रूप देखकर अन्य आतंकी मौके से भाग निकले।

आतंकी समर्थकों ने घर जला दिया

रमजान शेख की मौत से पूरा परिवार सदमे में डूबा था। आतंकियों के डर से बहुत से रिश्तेदार और पड़ोसी भी जनाजे से दूर रहे। वहीं, मारा गया आतंकी शौकत कुमार उर्फ शौकत फलाही भी निकटवर्ती गांव त्रेंज का रहने वाला था। इस पर आतंकी समर्थक गांव में पहुंचना शुरू हो गए।

दिवंगत रमजान शेख के भाई फारूक अपने भाई के चारों बच्चों और अपने परिवार को लेकर पास के एक बाग में छिप गए। इस दौरान भीड़ ने उनके घर में आग लगा दी। इस पर कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने परिवार को सेफ हाउस में स्थानांतरित कर दिया।

आजमगढ़ के मदरसे में पढ़ा था आतंकी शौकत

इरफान के चाचा फारूक अहमद ने कहा कि अब इमरान नयी जिदगी की शुरुआत कर चुका है, वह हमारे लिए नहीं दूसरों के लिए भी मिसाल है। आतंकियों के समर्थकों में भी इस बात का डर है कि लोग इरफान की तरह उनके साथ सुलूक कर सकते हैं। इसलिए वह हमारे गांव की तरफ नहीं आते। वहीं, इरफान के हाथों मारा गया शौकत कुमार वर्ष 2016 में आतंकी बना था। वह त्रेंज का रहने वाला था और आजमगढ़ (यूपी) स्थित जमात-ए-इस्लामी हिद के मदरसे जमात उल फलाह में इस्लाम की पढ़ाई कर आया था।