पिथौरागढ़। लखनपुर से नजंग के बीच मार्ग नहीं खुला तो इस वर्ष कैलास मानसरोवर यात्रियों को वायु सेना के हेलीकॉप्टर से सीधे चौथे पैदल पड़ाव गुंजी उतारा जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो इस बार कैलास मानसरोवर यात्रियों को मात्र दो दिन ही पैदल यात्रा करनी पड़ेगी और दो पैदल पड़ावों में प्रवास करना होगा।

कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भूस्खलन के चलते लखनपुर से नजंग के बीच ध्वस्त हो गया है। लखनपुर से मालपा के बीच घटियाबगड़ से चीन सीमा लिपूलेख तक बन रही सड़क का कार्य चल रहा है और इसे पूरा होने में कई महीने लग सकते हैं।

इसके चलते बीते दिनों दिल्ली में कैलास मानसरोवर यात्रा को लेकर हुई बैठक में यात्रियों को हेलीकाप्टर सेवा मुहैया कराने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसमें एक विकल्प वायु सेना के हेलीकाप्टर से यात्रियों को सीधे गुंजी तक पहुंचाना भी शामिल रहा। इस बार 12 जून से यात्रा शुरू होकर 22 सितंबर को समाप्त होगी।

इस दौरान मौसम के तेवर बेहद तल्ख रहते हैं। ऐसे में लखनपुर से नजंग होते हुए मालपा तक यात्रा का संचालन बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगा। कैलास मानसरोवर यात्रा की नोडल एजेंसी कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक टीएस मार्तोलिया ने कहा कि यात्रियों को हेलीकाप्टर सेवा प्रदान करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास है। सुरक्षित यात्रा के लिए इस तरह के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार आवश्यक है।

चार पैदल पड़ाव हो जाएंगे कम -

हेलीकॉप्टर से गुंजी यात्रियों को पहुंचाने पर चार पैदल पड़ाव सिर्खा, गाला, बूंदी व मालपा नहीं रहेंगे। वहीं यात्रियों को नारायणआश्रम से सिर्खा 6 किमी, सिर्खा से गाला 13 किमी, गाला से बूंदी 20 किमी, बूंदी से गुंजी 12 किमी पैदल नहीं चलना पड़ेगा। यात्रियों को गुंजी से अंतिम भारतीय पड़ाव नावीढांग 14 किमी और नावीढांग से चीन सीमा लिपूलेख तक 9 किमी पैदल चलना होगा।