देहरादून। यूनेस्को ने कैलास भू-क्षेत्र को विश्व धरोहर की अंतरिम सूची में भी शामिल कर लिया है। जानकारी सामने आई है कि पवित्र कैलास भूक्षेत्र भारत समेत चीन व नेपाल की संयुक्त धरोहर है। अब इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के प्रयास किये जा रहे हैं। एशिया पैसेफिक क्षेत्र के देशों की प्राकृतिक धरोहरों को वैश्विक फलक पर पहचान दिलाने का कार्य यूनेस्को के -दो सेंटर के माध्यम से का कार्य करने वाली अथॅारिटी के सहयोग से किया जाएगा।

इस पहल का असर यह होगा कि राष्ट्रीय महत्व वाले इस क्षेत्र को प्राकृतिक के साथ ही सांस्कृतिक (मिश्रित) श्रेणी की संरक्षित धरोहर का दर्जा मिलेगा। इससे इस क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को नुकसान नहीं पहुंचेगा। साथ ही इस क्षेत्र की परंपराएं भी जीवित रह सकती हैं। इस मामले में कैटेगरी सेंटर के निदेशक डॉ. वीबी माथुर ने दैनिक जागरण को बताया कि नेपाल की अंतरराष्ट्रीय संस्था इसीमोड और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र आदि ने इसमें अहम भूमिका निभाई। पवित्र कैलास भूक्षेत्र भारत समेत चीन व नेपाल की संयुक्त धरोहर है।

इन्होंने किया सहयोग

कैटेगरी सेंटर के निदेशक डॉ. वीबी माथुर ने दैनिक जागरण को बताया कि नेपाल की अंतरराष्ट्रीय संस्था इसीमोड और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र आदि ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

यूनेस्को की अंतरिम सूची में बड़ा भाग

कैलास क्षेत्र को संरक्षित विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए चीन व नेपाल पहले ही अपना प्रस्ताव यूनेस्को को भेज चुके थे। भारत ने अपने भू भाग के लिए 7120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को यूनेस्को से प्रारंभिक मंजूरी प्रदान करा दी है। अब विभिन्न देशों का 31 हजार 252 वर्ग किलोमीटर भाग यूनेस्को की अंतरिम सूची में शामिल हो गया है।