नई दिल्ली। बीएस येदियुरप्पा गुरुवार सुबह 9 बजे कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही तीसरी बार कर्नाटक के सीएम बन गए हैं। भाजपा ने येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद के चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा था। आरएसएस के एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर दक्षिण भारत में भाजपा को पहली बार जीत दिलाकर येदियुरप्पा पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हालांकि, साल 2011 में भ्रष्टाचार के आरोप में मुख्यमंत्री पद से हटने की उनकी राजनीतिक यात्रा उतार-चढ़ाव भरी रही है।

उनका कार्यकाल विवादित रहा है और उन पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगे और खनन घोटाले के कारण मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा का दामन छोड़कर अपनी कर्नाटक जनता पार्टी बनाई, लेकिन कुछ खास नहीं कर पाने के बाद वह फिर से भाजपा में शामिल हो गए। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के लोगों में उनकी खासी पकड़ है। येदियुरप्पा के कारण ही लिंगायत बीजेपी को वोट देते आ रहे हैं और वो उनके परंपरागत वोटर बने हुए हैं। जानते हैं येदियुरप्पा के राजनीतिक सफर के बारे में...

कर्नाटक के मांड्या जिले के बुकानाकेरे में 27 फरवरी 1943 को लिंगायत परिवार में येदियुरप्पा का जन्म हुआ था। उनका नाम लिंगायत समुदाय के शैव देवता के येदियुर स्थित मंदिर के पर रखा गया। वह छात्र जीवन से ही वह राजनीति में सक्रिय रहे और 1972 में उन्हें शिकारीपुरा तालुका जनसंघ का अध्यक्ष चुना गया। एक चावल मिल में बतौर क्लर्क काम करते हुए जनसंघ के लिए भी काम किया।

1975 में इमरजेंसी के दौरान उन्हें शिमोघा और बेल्लारी के जेल में 45 दिनों तक जेल में भी बंद थे।

साल 1983 में कर्नाटक विधानसभी चुनाव में जीत के बाद पहली बार विधायक बने। उन्होंने 6 बार शिकारीपुरा का प्रतिनिधित्व किया।

1988 में उन्हें राज्य भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया। 1994 में उन्हें कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया।

2004 में उन्हें दोबारा विपक्ष का नेता बनाया गया। धरम सिंह की सरकार को गिरने के लिए बीजेपी ने जेडीएस के साथ हाथ मिलाया और कुमारस्वामी को सीएम बनाया गया। मगर, शर्त रखी गई कि दोनों दलों के नेता बारी-बारी से सीएम बनेंगे। मगर, कुमारस्वामी ने कुर्सी छोड़ने से मना कर दिया। बीजेपी ने जेडीएस से समर्थन वापस ले लिया।

2007 में राष्ट्रपति शासन के बाद दोनों दलों ने मतभेद भुला दिया और येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाया गया। मगर, मंत्रालय को लेकर मतभेद के बाद जेडीएस ने समर्थन वापस ले लिया।

साल 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की और येदियुरप्पा सीएम बने। इस चुनाव में येदियुरप्पा ने पूर्व सीएम एस बंगारप्पा को हराया था।

लेकिन उनका ये कार्यकाल विवादित रहा। उन्हें कथित भूमि और खनन घोटाले में नाम आया और इस्तीफा देना पड़ा। लोकायुक्त की रिपोर्ट में उन्हें दोषी पाया गया और जेल जाना पड़ा। योदियुरप्पा 20 दिनों तक जेल में रहे। उनके साथ ही उनके दोनों बेटों को भी इन मामलों में दोषी ठहराया गया था।

उन्होंने 2012 में विधायक और बीजेपी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कर्नाटक जनता पक्ष के नाम से एक नई पार्टी शुरू की। साल 2013 में उन्होंने भाजपा में दोबारा आने के लिए बातचीत शुरू की और 2014 लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया।