बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। हालांकि, भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन बहुमत से अब भी 8 सीट दूर है। वहीं कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देकर बहुमत का आंकड़ा जुटा लिया है। अब सब कुछ राज्य के राज्यपाल के हाथ में हैं। सिलसिलेवार तरीके से पढ़ें बुधवार का अब तक का पूरा घटनाक्रम-

- गठबंधन कर सरकार बनाने के लिए बहुमत होने का दावा कर रही जेडीएस और कांग्रेस के नेता विधायकों ने मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है।

- भाजपा नेता जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान, अनंत कुमार और मुरलीधर राव ने विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के घर जाकर मुलाकात की।

- कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम दोपहर 12.30 बजे से राज्यपाल से मिलने का वक्त मांग रहे हैं। हमने उन्हें दो पत्र सौंपे हैं जिनमें से एक कांग्रेस विधायकों का है और दूसरा जेडीएस विधायकों का।

- आजाद ने कहा कि विधायक चुराने की मंजूरी नहीं है। कोई भी राज्यपाल संविधान के विरोध में नहीं जा सकता। हमें उन पर पूरा विश्वास है कि वो अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

- भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येदियुरप्पा ने बुधवार सुबह 10.30 बजे विधायक दल की बैठक में हिस्सा लिया, जहां उन्हें दल का नेता चुन लिया गया। इसके बाद वे राज्यपाल से मिले और सरकार बनाने का दावा पेश किया।

- राजभवन से बाहर आने के बाद येदियुरप्पा ने कहा, हमने राज्यपाल के सामने अपनी बात रखी है। उन्होंने (राज्यपाल) ने कहा है कि वे विचार करने के बाद सूचना देंगे।

इससे पहले कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने प्रेस से बात करते हुए कहा है कि कांग्रेस और जेडी (एस) स्पष्ट रूप से बहुमत स्थापित करते हैं फिर भी राज्यपाल ने श्री कुमारस्वामी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का निर्णय नहीं लिया है। हमने सुना है कि राज्‍यपाल ने बीएस येदियुरप्पा को आमंत्रित किया हो सकता है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

Congress & JD(S) clearly establish majority yet Governor hasn't taken decision to invite Shri Kumaraswamy to form govt. We heard Guv may have invited BS Yeddyurappa but since it is not confirmed we are proceeding on basis that Guv has not decided to invite anyone: P Chidambaram pic.twitter.com/YwZzdbh7gD

— ANI (@ANI) 16 May 2018

- पार्टी विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद जेडीएस के कुमारस्वामी ने कहा, मुझे भाजपा और कांग्रेस, दोनों तरफ से समर्थन का ऑफर था। मैंने 2004 और 2005 में भाजपा के हाथ मिलने का फैसला किया था और यह फैसला मेरे पिता एचडी देवेगौड़ा के माथे पर काले धब्बे की तरह था। भगवान में अब मुझे यह काला दाग मिटाने का मौका दिया है। इसलिए मैंने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया है।

- कुमारस्वामी ने यह आरोप भी लगाया कि उनकी पार्टी के विधायकों को भाजपा की ओर से 100-100 करोड़ रुपए और कैबिनेट बर्थ का लालच दिया जा रहा है। कुमारस्वामी ने कहा, वे कांग्रेस नेताओं के साथ राजभवन जाएंगे और सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

- वहीं केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने 100 करोड़ का लालच दिए जाने के कुमारस्वामी का आरोप को खारिज करते हुए कहा कि ये बातें मनगढंत हैं। इस तरह की राजनीतिक कांग्रेस करती है।

- कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों के दस्तखत वाला एक पर्चा तैयार किया है, जिसे शाम तक राज्यपाल के समक्ष पेश किया जाएगा। इस तरह ये दोनों दल सरकार बनाने का अपना दावा पेश करेंगे।

- इससे पहले भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बनाएंगी। बकौल जावड़ेकर, कांग्रेस के कई विधायक बात से नाखुश है कि पार्टी जेडीएस से गठबंधन कर रही है।

- बड़ी खबर यह है कि बेंगलुरू के एक पांच सितारा होटल में हो रही जेडीएस विधायक दल की बैठक में दो विधायक नहीं पहुंचे हैं। इन दो विधायकों के नाम हैं - राजा वेंकटप्पा नायक और वेंकट राव नाडागौड़ा।

- इसी तरह कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी 78 में से 66 विधायक ही पहुंचे हैं। हालांकि कांग्रेस नेता एमबी पाटिल का कहना है कि कांग्रेस के सभी विधायक साथ हैं। उनके मुताबिक, भाजपा के 6 विधायक कांग्रेस के सम्पर्क में हैं।

- एएनआई के मुताबिक, कर्नाटक में केपीजेपी पार्टी का विधायक आर शंकर बेंगलुरू में राज्यपाल भवन में भाजपाई खेमे में नजर आया है। नीचे देखें तस्वीर (तिलकधारी)

- कांग्रेस ने जेडीएस विधायकों की नाराजगी की खबरों का खंडन किया है। कांग्रेस नेता गुलाम बनी आजाद और सिद्धारमैया ने कहा कि सभी विधायक जेडीएस के साथ हैं और उनका पार्टी पर भरोसा कायम है। कोई कहीं नहीं जा रहा।

- कांग्रेस नेता रामालिंगा रेड्डी ने कहा कि हमें हमारे सभी विधायकों पर भरोसा है। भाजपा हमारे विधायकों को पाने की पूरी कोशिश में लगी है। उन्हें लोकतंत्र में विश्वास नहीं है, भाजपा को बस सत्ता चाहिए।

जेडीएस नेता सरवना ने कहा कि मुझे नहीं पता भाजपा हमारे विधायकों को क्या प्रलोभन दे रही है, लेकिन वो हमारे लोगों को कॉल कर रहे हैं। हालांकि, हमारे विधायक प्रतिक्रिया नहीं दे रहे। हम साथ हैं और कोई भी हमारी पार्टी को छू नहीं सकता।

राज्यपाल के पाले में गेंद

मंगलवार को आए नतीजों के बाद अब पूरा दारोमदार राज्यपाल पर है कि वो किसे सरकार बनाने के लिए बुलाते हैं।

राजभवन की भूमिका :

- परिपाटी सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका देने की रही है।

- चुनाव पूर्व गठबंधन हो तो सबसे ज्यादा सीटों के आधार पर उसे मौका मिल सकता है।

- लेकिन कर्नाटक में चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं है।

- त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में राज्यपाल को विवेकाधिकार से फैसला लेने का अधिकार।

- ऐसे में जिस पार्टी या गठबंधन को पहले मौका मिल जाता है, उसे स्थिति का लाभ मिलने की संभावना बन सकती है।

- इसीलिए अब पहले मौका पाने की होड़ शुरू हो गई है।

कांग्रेस के कुछ लिंगायत विधायक खफा

इस बीच, कांग्रेस-जदएस के मिलकर सरकार बनाने की तैयारी में पेंच फंस गया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के कुछ लिंगायत विधायकों ने कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध कर दिया है। खबर यह भी आ रही है कि कांग्रेस अपने विधायकों को पार्टी छोड़ने के डर से आंध्र प्रदेश या पंजाब भेजने की योजना बना रही है।

जदएस से भी टूट सकते हैं कुछ

माना जा रहा है कि चूंकि कांग्रेस और जदएस का चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं था और भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, इसलिए उसे पहला न्योता मिलेगा। सूत्रों की मानी जाए तो जदएस के कुछ विधायक भी भाजपा के साथ जाना चाहते हैं। ऐसे में स्थितियां बदलें तो आश्चर्य नहीं। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा व राजग की सरकार 21 राज्यों में हो जाएगी। कांग्रेस और सिमटकर सिर्फ तीन राज्यों-पंजाब, मिजोरम और पुडुचेरी में रह जाएगी।

कर्नाटक विधानसभा : दलीय स्थिति

कुल सीटें : 224

चुनाव हुए : 222

बहुमत का आंकड़ा : 112

भाजपा : 104 (+65)

कांग्रेस : 78 (-44)

जदएस + : 38 (-2)

अन्य : 02 (-20)

- (शेष दो सीटों पर चुनाव होने के बाद बहुमत का आंकड़ा 113 हो जाएगा)

संभावित सियासी बिसात

भाजपा :-

स्थिति :

पार्टी को 104 सीटें। ऐसे में उसे बहुमत के लिए कम से कम आठ विधायकों की जरूरत होगी। दो अन्य का समर्थन मिलने पर भी बहुमत से छह अंक दूर।

रणनीति :

- कांग्रेस/जदएस के कुछ विधायकों से इस्तीफे दिलाकर सदन की प्रभावी संख्या कम कर अभी बहुमत साबित करने की कोशिश करे।

- विपक्षी दलों में तोड़फोड़ से उसके विधायकों को अपने पाले में करे।

कांग्रेस :-

स्थिति :

78 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर। बसपा के साथ जदएस की 38 सीटों को जोड़ने पर बहुमत से चार ज्यादा। दोनों पार्टियां टूट या बगावत से बची रहीं तो सरकार गठन में अड़चन नहीं।

रणनीति :

- भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए जदएस को समर्थन का एलान किया।

- जदएस ने भी कांग्रेस से मिले ऑफर को हाथों-हाथ लिया।