पटना। चारा घोटाला के एक मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को रांची की सीबीआई अदालत द्वारा साढ़े तीन सान की सजा के बाद अब अगला सवाल यह है कि अब उनकी जमानत का क्या होगा?

इस बारे में कुछ वरिष्ठ विधिवेत्ताओं की राय है कि सजा की अवधि कम होने का मतलब यह नहीं कि लालू को तुरंत जमानत मिल जाएगी। चारा घोटाला मामले में जमानत के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की वजह से भी लालू प्रसाद को जमानत तुरंत मिलने में परेशानी हो सकती है।

पटना उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरि का कहना है कि जमानत की याचिका फाइल करने की प्रक्रिया में समय तो लगेगा ही साथ ही साथ उच्च न्यायालय में विशेष अदालत से रिकॉर्ड जाने की भी एक प्रक्रिया है। इसमें भी समय लगता है। इसलिए यह कहना कि तुरंत बेल मिल जाएगी, उचित नहीं। मेरिट पर भी सुनवाई होगी और इसमें भी समय लगेगा।

गिरि ने कहा कि इसके अतिरिक्त चारा मामले में ही सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय यह है कि विशेष अदालत द्वारा जो सजा सुनायी गई है, उस अवधि का पचास फीसद जेल में काटने के बाद ही जमानत संभव है।

वैसे सुप्रीम कोर्ट से ही पिछली बार लालू प्रसाद को जमानत मिल चुकी है। उस समय लालू प्रसाद की सजा की अवधि पांच वर्ष की थी। हां, स्वास्थ्य वजहों से जमानत के तर्क को आधार मिल सकता है।