कोलकाता। लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण का मतदान 19 मई, रविवार को होना है और इससे पहले सभी की नजर पश्चिम बंगाल पर टिकी है। यहां कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान जबरदस्त हिंसा हुई और भाजपा-टीएमसी के आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनाव आयोग ने गुरुवार रात 10 बजे बाद चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी। इस चरण में बंगाल की 9 सीटों पर मतदान होगा। ये हैं - दम दम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, डायमंड हार्बर, जाधवपुर, कोलकाता दक्षिण, कोलकाता उत्तर। जानिए मतदान के पहले चरण से जारी बंगाल की हिंसा इस चरण में क्यों सबसे ज्यादा भड़की -

दीदी का गढ़ में सेंध की कोशिश में भाजपा: इस चरण में जिन सीटों पर चुनाव होना है, वो तृणमूल कांग्रेस की परंपारगत सीटे रही हैं। भाजपा ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंकी है। इसी चरण में जाधवपुर और साउथ कोलकाता सीट पर वोटिंग होगी, जहां से ममता बनर्जी ने अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। 1984 में जाधवपुर में ही ममता ने अपनी पहली बड़ी और चर्चित जीत दर्ज की थी, जब उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को हराया था। इसके बाद वे साउथ कोलकाता सीट पर शिफ्ट हो गई थीं और छह बार सांसद रहीं। इसके अलावा, डायमंड हार्बर सीट पर भी दीदी की प्रतिष्ठा दांव पर है, जहां उनका भतीजा मौजूदा सांसद है और इस बार भी चुनाव लड़ रहा है।

भाजपा के लिए बड़ा मौका: भाजपा को इन सीटों पर इस बार बड़ी उम्मीद है। कारण- 2014 में कोलकता नॉर्थ और कोलकाता साउथ पर भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। तब साउथ कोलकाता में टीएमसी को 20.24% वोट का नुकसान हुआ था और भाजपा के खाते में 21.33% वोट बढ़े थे। इसी तरह नॉर्थ कोलकाता में टीएमसी को जीत जरूर मिली थी, लेकिन उसका वोट शेयर गिरकर 35.94% पहुंच गया था। भाजपा को 25.88% वोट मिले थे। इसी तरह दम दम सीट भाजपा पहले जीत चुकी है। वहीं भारत-बांग्लादेश की सीमा पर स्थित बशीरहाट सीट मुस्लिम बहुल है और यहां अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी, तस्करी और गोहत्या प्रमुख मुद्दे हैं। भाजपा को यहां भी जीत की आस है।

दिग्गजों को बदलना पड़ी रणनीति: नियमानुसार पश्चिम बंगाल में शुक्रवार शाम को चुनाव प्रचार थमना था, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे गुरुवार रात 10 बजे ही खत्म कर दिया। इसका असर सभी दलों के चुनाव प्रचार अभियान पर पड़ा। शुक्रवार को ममता बनर्जी की रैलियां थी, जिन्हें गुरुवार को शिफ्ट किया गया। हालांकि टीएमसी और कांग्रेस इस बात को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना कर रहे हैंं कि गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी की रैलियों पर रोक नहीं लगाई गई।