भाजपा ने जैसे ही गुरदासपुर से सनी देओल को पार्टी प्रत्याशी बनाने की घोषणा की, तब से सांसद विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना निराश है और खुद को छला हुआ महसूस कर रही है। उन्हें उम्मीद थी कि गुरदासपुर से पार्टी का टिकट उन्हें मिलेगा। अब निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

उन्होंने कहा था 'मेरे साथ विश्वासघात हुआ है। मुझे यह भी लगता है कि मुझे सांसद के रूप में देखने वाले लोगों की इच्छाओं को नजरअंदाज कर दिया गया।'

कविता के मुताबिक उन्होंने विनोद खन्ना के साथ गुरदासपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए 20 वर्षों तक काम किया।

उन्होंने कहा, 'मुझे भगवान पर भरोसा है। जीवन एक सफर है। मैंने यहां 20 साल काम किया है। जब विनोदजी अस्वस्थ थे, तब मैं निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से मिला करती थी। लोग मुझे सांसद के रूप में चाहते थे।'

लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा का टिकट पाने की उम्मीद में, कविता पिछले कई सप्ताह से गुरदासपुर में जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से मिल रही थीं।

इस साल जनवरी में गुरदासपुर में एक रैली में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्र के विकास के लिए विनोद खन्ना के प्रयासों को याद किया था। उन्होंने कहा था, 'विनोद खन्ना ने इस जगह की प्रगति के लिए प्रयास किए। वह आधुनिक और समृद्ध गुरदासपुर देखना चाहते थे, हमें उनके सपने को साकार करना है।'

वर्तमान में, गुरदासपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेस सांसद सुनील जाखड़ ने किया है, जिन्होंने 2017 के उपचुनाव में सीट जीती थी।

जाखड़ ने भाजपा प्रत्याशी स्वर्ण सलारिया को 1,93,219 मतों के अंतर से हराया था।

बीजेपी के 2017 गुरदासपुर उपचुनाव के उम्मीदवार स्वर्ण सिंह सलारिया को भी सनी देओल को टिकट मिलने से निराशा हुई है। उन्होंने हाल ही में कहा कि 27 अप्रैल को भविष्य की योजनाओं के बारे में घोषणा करेंगे।

बता दें कि साल 2017 में 2017 में, उपचुनाव के लिए भाजपा के टिकट के लिए कविता सबसे आगे थीं, लेकिन पार्टी ने उनकी बजाए बिजनेसमैन सलारिया को चुना। विनोद खन्ना ने 1998, 1999, 2004 और 2014 में सीट जीती थी। उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र के दूरदराज के गांवों को जोड़ने के लिए 'पुलों का सरदार' के रूप में जाना जाता था।