आगरा। अद्भुत सौंदर्य का प्रतिमान ताजमहल। हाल में जर्नल "करंट साइंस" में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज, बेंगलुरु द्वारा किए गए अध्ययन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एकरूपता के लिए दुनिया में विख्यात ताज में भी खामियां हैं। ताज अपने सौंदर्य के साथ ही अपनी एकरूपता के लिए भी दुनिया में जाना जाता है। दुनिया के सातवें अजूबे पर हाल में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज, बेंगलुरु द्वारा अध्ययन किया गया है। सैटेलाइट इमेज एक्सपर्ट एमबी रजनी और डॉ. दिलीप आहूजा ने कई बार ताज देखने के बाद यह रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

ताज के गुंबद के फोटो स्कैन करने के बाद उन्होंने अपने अध्ययन में उसके दोनों किनारों पर 0.5 से 5.5 फीसद तक का अंतर पाया। उन्होंने गुंबद के फोटो को होरीजेंटल लाइंस में बांटकर जांच की। इसके बाद उन्होंने पिक्सेल की गिनती की। इसमें पाया कि गुंबद के मध्य से उसके दोनों किनारों तक फाउंडेशन (नींव) और पिनेकल (सुर्री) को छोड़कर कहीं भी एकरूपता नहीं है। अध्ययन रिपोर्ट में उन्होंने यह भी लिखा है कि ताज के गुंबद के निर्माण में जो फ्लो है, उसके चलते इसके सौंदर्य पर कोई प्रभाव नजर नहीं आता है, मगर इस असमानता की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि पता चल सके कि इससे उसके अस्तित्व के लिए कोई संकट तो नहीं है। अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम ने बताया कि रिसर्च पेपर उन्होंने देखा नहीं है। उसे देखने के बाद ही कुछ कहना संभव होगा।