चेन्नई। मद्रास हाई कोर्ट ने आज एक अनोखा फैसला लेता हुए सलेम में रह रही बीमार हथिनी राजेश्वरी को दया मृत्यु दिए जाने की अनुमति दे दी है। इंडियन सेंटर फॉर एनिमल राइट्स एजुकेशन के संस्थापक एस मुरलीधरन की याचिका पर हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया है।

राजेश्वरी पर सलेम स्थित अरुलमिगु सुगावानेश्वर मंदिर का मालिकाना हक था। करीब एक दशक पहले हथिनी ने अपनी एक टांग खो दी थी। तब से वह तीन टांगों पर खड़ी थी जिस कारण उसे गठिया रोग हो गया। हाल में जब डॉक्टर उसे अर्थ मूवर की मदद से उसे उठाने की कोशिश कर रहे थे तब वह गिर गई।

इस हादसे के बाद वह ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी। मुरलीधरन ने अपनी अपील में कहा था कि ऐसे में भी उसे जिंदा रखना पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम की धारा 13 (3) का उल्लंघन होगा।

कोर्ट ने अपने आदेश में दया मृत्यु दिए जाने से पहले पशु चिकित्सकों से एक प्रमाणपत्र जमा कराने को कहा है। उन्हें प्रमाणित करना है कि राजेश्वरी का इलाज नहीं किया जा सकता और उसे जिंदा रखना अमानवीय होगा।

उल्लेखनीय है कि हाल में सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों के जीने के साथ ही मरने के अधिकार को भी मान्यता देते हुए पैसिव यूथेनेशिया या इच्छा मृत्यु को वैध करार दिया है।