मल्टीमीडिया डेस्क। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीबीआई से जुड़े विवाद को उन्होंने इतना तूल दे दिया है कि आज पूरे देश में इसकी बात हो रही है। वैसे ममता शुरू से तुनकमिजाज नेता रही हैं। वे कई बार आपा खो चुकी हैं और विवादित बयान दे चुकी हैं। पढ़िए ऐसे ही कुछ वाकयों के बारे में -

जिस गठबंधन में रहीं, संबंंध बिगाड़कर अलग हो गईं

ममता बनर्जी जिस गठबंधन सरकार में रहीं, उससे विवाद हुआ। वर्ष 1991 में जब नरसिम्‍हा राव की सरकार बनी तो उन्हें मानव संसाधन विकास, युवा मामले और खेल के साथ ही महिला और बाल विकास राज्य मंत्री बनाया गया। खेल मंत्री के तौर पर उन्होंने देश में खेलों की दशा सुधारने को लेकर सरकार से मतभेद होने पर इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने एक रैली के दौरान इस्तीफे का ऐलान करते हुए सरकार पर आरोप लगाया था कि खेल मंत्रालय के साथ 'खेल' किया जा रहा है।

इसी तरह अप्रैल 1996-97 में ममता ने कांग्रेस पर बंगाल में सीपीएम की कठपुतली होने का आरोप लगाया और 1997 में कांग्रेस से अलग हो गईं। वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी मंत्री रहीं, लेकिन गठबंधन में उनके संबंध कभी सामान्य नहीं रहे। ममता बनर्जी अलग-अलग मुद्दों पर जब-तब नाराजगी जाहिर करती रहती थीं।

2012 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी ममता ने विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने फेसबुक पेज लांच कर एपीजे अब्दुल कलाम के नाम का समर्थन मांगा था, जबकि यूपीए ने प्रणब मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया था।

अटलजी ने ममता की मां से कहा था, आपकी बेटी बहुत तंग करती है

यूं तो ममता बनर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी का बहुत सम्मान करती थीं, लेकिन उनकी सरकार में रहते हुए परेशानियां भी खूब खड़ी करती थीं। जब ममता रेल मंत्री थी, तब एक बार पेट्रोल-डीजल के दाम अचानक बढ़ गए। इस पर ममता दीदी गुस्सा हो गईं। उन्हें मनाना भी जरूरी था, आखिरी सरकार गिरने का जो डर था।

अटलजी ने अपने पक्के दोस्तों में से एक जॉर्ज फर्नांडिस को कोलकाता भेजा। बताते हैं जॉर्ज रात भर इंतजार करते रहे, लेकिन ममता मिलने नहीं आईं। इसके बाद एक दिन अचानक अटलजी, ममता कोलकाता वाले घर पहुंच गए। ममता तो कोलकाता भी नहीं थी, लेकिन अटलजी उनकी मां से मिले, उनके चरण स्पर्श किए और बोले - आपकी बेटी बहुत शरारती है, बहुत तंग करती है। बताते हैं कि इसके बाद ममता का गुस्सा कुछ कम हो गया।

गुस्सा में बेकाबू होती जुबान

एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स) के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने कहा था कि अगर बंगाल में एनआरसी थोपने की कोशिश की गई तो गृह युद्ध के हालात बन जाएंगे और खून खराबा होगा।

दिसंबर 2014 में ममता ने एक रैली में कहा था, बांस जंगल में उगता है और घर बनाने के काम में आता है, लेकिन जब आप किसी को बांस देने की कोशिश करते हैं और वह पलट कर पीछा करता है तो आपको पता चलता है कि इसका असली मजा क्या है।

आजकल भाजपा और टीएमसी के बीच तनातनी बढ़ गई है। बीते दिनों ममता ने कहा था, टीएमसी, भाजपा की तरह एक आतंकवादी संगठन नहीं है। न केवल ईसाइयों और मुसलमानों को बल्कि हिंदुओं के बीच झगड़े कराने का काम भाजपा कर रही है।