बेंगलुरु। एनी सिन्‍हा रॉय देश की अकेली महिला टनल इंजिनियर हैं। वह सुरंगें खोदती हैं, जिनके अंदर से दर्जनों मेट्रो गुजरती हैं और हजारों लोगों की जिंदगी आसान हो गई है। उन्‍हें अपने काम पर गर्व है। 35 वर्षीय एनी ने शुक्रवार को दक्षिण भारत के पहली अंडरग्राउंड मेट्रो रेल के उद्घाटन से पहले एक किस्‍सा सुनाया।

एनी ने बताया कि दिल्ली मेट्रो में जॉब के पहले दिन वह कंस्ट्रक्शन साइट पर पहुंचीं। वहां उन्‍होंने लोगों को फुसफसाते हुए यह कहते सुना कि यह कोई विजिटर होंगी, जो साइट देखने आई होंगी। उस दिन वहां साइट पर करीब 100 पुरुष थे, जिनमें से ज्यादातर मजदूर थे और कुछ इंजिनियर शामिल थे।

वहां कोई टॉयलेट नहीं था और बैठने के लिए भी कोई जगह नहीं थी। चारों तरफ मलबा ही मलबा फैला पड़ा था। वह याद करती हैं कि कुछ ही घंटों के बाद वह बड़ी मशीन के सामने खड़ी थी, जिससे जमीन को तोड़ना था। हालांकि, वह मशीन काम करते हुए फंस गई।

एक जर्मन इंजिनियर और मेरे बॉस ने भीतर जाकर नट खोलने को कहा। इससे पहले कि यह बात दिमाग में आती कि मैं क्या करने जा रही हूं, मेरे चेहरे पर हाइड्रोलिक तेल गिर गया। वहां मौजूद मेरे एक साथी कर्मचारी ने कहा कि इस तेल के गिरने के कारण मेरा चेहरा उम्र भर ग्लो करेगा।

हालांकि, आज टनलिंग मेरा जीवन है। बेंगलुरु में वह अकेली महिला हैं, जिसने सुरंग खोदने वाली मशीन गोदावरी को चलाया। इस मशीन से हाल ही में सम्पीज रोड से मजेस्टिक तक अंडरग्राउंड बोरिंग का काम पूरा किया गया है। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में मई 2015 में उन्‍होंने बतौर असिस्‍टेंट इंजीनियर जॉइन किया।

नागपुर यूनिवर्सिटी से मकैनिकल इंजिनियरिंग की डिग्री लेने के वाद वह मास्टर्स डिग्री लेना चाहती थीं। मगर, पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्‍मेदारी उठाने और वित्‍तीय संकट से परिवार को निकालने के लिए उनहोंने नौकरी कर ली।

आज ऐनी अपने काम से बहुत खुश हैं और चाहती हैं कि महिलाओं को उन क्षेत्रों में आगे बढ़कर काम करना चाहिए, जो पुरुषों के लिए काम करने वाले क्षेत्र माने जाते हैं। वह कहती हैं कि मैं चाहती हूं महिलाएं टनल के भीतर काम करें, टनल बोरिंग मशीनें चलाएं।