केदार दत्त, देहरादून। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में हरिद्वार में गंगा और उसकी सहायक नदियों में रेत, बजरी और बोल्डर (रिवर बेड मटीरियल) के चुगान से संबंधित चल रहे मामले का निस्तारण होने के बाद अब वहां खनन का रास्ता साफ हो गया है। इससे उत्तराखंड वन विकास निगम ने राहत की सांस ली है। इसके साथ ही निगम की ओर से गंगा और उसकी सहायक नदियों रवासन व कोटावली की सात लॉट में खनन के मद्देनजर एन्वायरंमेंट क्लीयरेंस (ईसी) के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को पत्र भेजा जा रहा है।

हरिद्वार में गंगा नदी में भोगपुर, बिशनपुर, श्यामपुर, चिड़ियापुर और गंगा की सहायक नदी रवासन में उपखनिज चुगान के लिए सात लॉट की लीज स्वीकृति उत्तराखंड वन विकास निगम को मिली है। पिछले साल वहां से करीब 3.34 लाख घन मीटर रेत, बजरी और बोल्डर का चुगान किया गया था।

खनन को लेकर हुए विरोध के बाद मामला एनजीटी तक पहुंचा। एनजीटी के आदेश पर इस वर्ष फरवरी में हरिद्वार में गंगा और उसकी सहायक नदियों में खनन का कार्य रोक दिया गया था। वन विकास निगम के प्रभागीय लौगिंग प्रबंधक सोहनलाल के अनुसार एनजीटी ने 21 दिसंबर को गंगा में खनन से संबंधित मामला निस्तारित कर दिया है।

उन्होंने बताया कि अब एनजीटी के निर्देशानुसार वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआइ) के गंगा व उसकी सहायक नदियों में रिवर बेड मटीरियल को लेकर कराए गए अध्ययन के आधार पर निगम को खनन के लिए ईसी लेनी है। उन्होंने बताया कि पूर्व में निगम को इन नदियों की सात लॉट में 18 लाख घन मीटर उपखनिज चुगान की अनुमति थी, लेकिन बाद में केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान की अध्ययन रिपोर्ट पर इसे 10.26 लाख घनमीटर कर दिया गया।

गत वर्ष पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने इसे घटाकर 3.34 लाख घन मीटर कर दिया था। नई ईसी में इसके बढ़ने की संभावना है। उत्तराखंड वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक गंभीर सिंह ने बताया कि गंगा और उसकी सहायक नदियों में उपखनिज चुगान के संबंध में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को ईसी जारी करनी है। निगम की ओर से पहले ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

एनजीटी में मामला निस्तारित होने के बाद अब ईसी जारी करने के लिए पत्र भेजा जा रहा है। इसमें एफआरआइ की अध्ययन रिपोर्ट लगेगी। ईसी मिलने के बाद निगम फिर से गंगा और उसकी सहायक नदियों में चुगान शुरू करा सकेगा।