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    सुशासन को बढ़ावा देने डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का सहारा लेगी सरकार

    Published: Tue, 13 Jan 2015 09:38 AM (IST) | Updated: Tue, 13 Jan 2015 09:43 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    संजय सिंह, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिम गवर्नेंस' व 'मेक इन इंडिया' नारों को अमली जामा पहनाने के लिए सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों को तदनुरूप कार्यसंस्कृति विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में इनसे हर महीने प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी। यही नहीं, इन कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के इंतजाम भी बड़े पैमाने पर किए जा रहे हैं।

    'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' (न्यूनतम शासन, अधिकतम सुशासन) के नारे को जमीनी स्तर पर कार्यान्वित करने के लिए कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने सभी मंत्रालयों, विभागों, उपक्रमों के प्रमुख सचिवों/अध्यक्षों को नववर्ष पर बधाई संदेश के साथ एक चिट्ठी लिखी है। इसमें कहा गया है कि नए साल से प्रत्येक मंत्रालय/विभाग को हर महीने प्रत्येक डीओ लेटर पर 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' के हिसाब से उठाए गए कदमों व किए गए कार्यों का विवरण देना होगा। इसे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

    पंजाब में हलफनामों के बगैर सरकारी कामकाज पर भी फिल्म

    इस बीच कार्मिक, सार्वजनिक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय को भी सरकार के सुशासन एजेंडे से संबंधित योजनाओं, कार्यक्रमों व कामयाबियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रचार सामग्री तैयार कराने को कहा गया था। जवाब में मंत्रालय ने केंद्र व राज्यों में सुशासन को दर्शाने वाले कार्यक्रमों, योजनाओं को लेकर सात डॉक्यूमेंट्री फिल्में तैयार कराई हैं। इनमें एक फिल्म 'पंजाब में हलफनामों के बगैर सरकारी कामकाज' पर आधारित है। दूसरी रेल मंत्रालय के सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम (क्रिस) की कंट्रोल ऑफिस एप्लीकेशन की खूबियों को बयान करती है। एक अन्य डॉक्यूमेंट्री फिल्म मध्य प्रदेश सरकार के शहरी प्रशासन व विकास विभाग द्वारा तैयार 'ऑटोमेटेड प्लान एप्रूवल सिस्टम' (एबपास) पर बनाई गई है।

    केरल के त्रिचूर जिला प्रशासन व एनआईसी द्वारा संयुक्त रूप से तैयार 'एसएएनडी (सैंड) सिस्टम फॉर एट्टूमेनल न्यूरल डिस्ट्रीब्यूशन' पर बनी डॉक्यूमेंट्री को भी सुशासन संबंधी फिल्म श्रृंखला में जगह दी गई है। इसके अलावा कर्नाटक सरकार के आवास विभाग के अंतर्गत आने वाले राजीव गांधी रूरल हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के 'जीपीएस मोबाइल बेस्ड हाउसिंग मानीटरिंग सिस्टम' पर बनी फिल्म को भी सुशासन दर्शाने वाली माना गया है।

    तमिलनाडु में सर्विकल कैंसर स्क्रीनिंग के जरिये किस तरह सर्विकल कैंसर का समय रहते पता लगाकर अनेक महिलाओं की जान बचाई गई है इसकी कामयाबी पर बनी डॉक्यूमेंट्री को भी मंत्रालय ने अपनी प्रचार सामग्री का हिस्सा बनाया है।

    जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव की कामयाबी भी दिखेगी पर्दे पर

    यही नहीं, जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव की कामयाबी की गाथा पर बनी फिल्म भी सुशासन के पैमाने पर खरी उतरी है। सोमवार को पटेल भवन स्थित मंत्रालय के दफ्तर में इन सभी फिल्मों को सूचना व प्रसारण मंत्रालय, दूरदर्शन व फिल्म डिवीजन के अधिकारियों व विशेषज्ञों को दिखाया गया और इनमें सुधार के बाबत उनके सुझाव लिए गए। हरी झंडी मिलने पर इन्हें टीवी पर व सिनेमा हॉलों में फिल्मों से पहले दर्शकों को दिखाया जा सकता है।

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