वीके शुक्ला, नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व विभाग को लाल किले में करीब सवा दो सौ साल पुराना हमाम मिला है। जमीन में दबा हुआ यह हमाम मुमताज महल के दाहिनी ओर करीब 25 मीटर की दूरी पर है। इसके आसपास निर्माण थे, जिन्हें तोड़ा गया है।

एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक निर्माण तोड़े जाने के बाद एक स्थान पर जमीन में कुछ हिस्सा धंसा हुआ मिला। उस जगह की सफाई करवाई गई तो जमीन में करीब 12 फुट गहरा हमाम मिला है, जिसकी चौड़ाई करीब 15 फुट और लंबाई 40 फुट के करीब है। इस हमाम में गर्म और ठंडे पानी से नहाने के लिए अलग-अलग चैनल हैं। दोनों ओर से आने-जाने के रास्ते हैं।

अधिकारी ने बताया कि मुमताज महल की वजह से लालकिला का यह भाग अति संवेदनशील था। इधर बाहरी लोगों को आने की इजाजत नहीं थी। ऐसे में पूरी संभावना है कि यह मुमताज महल का ही शाही हमाम रहा होगा। उन्होंने कहा कि मोती मस्जिद के पास जो शाही हमाम बना है वह मुमताज महल के महल से काफी दूर है। बहरहाल अब इसका संरक्षण कार्य कराया जाएगा। एएसआई के अधिकारी दस्तावेजों में यह भी ढूंढ़ने का प्रयास कर रहे हैं कि इस हमाम का कोई प्रमाण व डिजाइन मिल जाए।

हमाम बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है और एक भाग में नहाने के लिए बैठने की पत्थर की सिर्फ दो सीटें बची हैं। दीवारों से कीमती पत्थर निकाल लिए गए हैं। छत को भी तोड़ दिया गया है। धरोहर को बचाने में लगी संस्था विरासत के अध्यक्ष व अधिवक्ता लखविदर सिह कहते हैं कि 1857 में जब अंग्रेजों ने लालकिला पर कब्जा कर लिया तो उन्होंने यहां बहुत तोड़फोड़ की। संभवतः उसी समय इसे तोड़ दिया गया होगा और इसके कीमती पत्थर निकाल लिए गए होंगे।

जल्द पूरा होगा संरक्षण कार्य

लालिकला में मुमताज महल के महल का संरक्षण कार्य जल्द ही पूरा होने जा रहा है। इसके संरक्षण का काम 112 साल के बाद कराया जा रहा है। इससे पहले इस महल का 1907 में संरक्षण कार्य कराया गया था। इस महल में 1919 से संग्रहालय चल रहा था। जिसको एएसआई ने मार्च 2018 में बंद कर दिया था। उसी समय से इसका संरक्षण कराने की योजना बन रही थी। महल के बीच वाटर चैनल के पूरे प्रमाण नहीं मिले हैं। इसलिए इस भाग को बालू से बंद कर फर्श को बराबर किया जाएगा। इसका मकसद यह है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इस भाग को खोला जा सकेगा। यह महल लालकिला में दक्षिणी और पूर्वी कोने के भाग में स्थित है।