नई दिल्ली। विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए अब नेट जरूरी नहीं होगा। सरकार ने 2021 से विवि में शिक्षकों की होने वाली सीधी भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। इसके तहत जुलाई 2021 से विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की होने वाली सीधी भर्ती के लिए अब सिर्फ पीएचडी अनिवार्य होगी।

अभी इसके लिए नेशनल एलिजेबिलिटी टेस्ट (नेट) भी जरूरी है। हालांकि शिक्षकों के भर्ती नियमों में यह बदलाव सिर्फ विवि स्तर पर ही किया गया है, जबकि कालेजों के स्तर पर भर्ती नियमों में नेट और पीएचडी की योग्यता को यथावत रखा गया है।

सरकार ने इसके अलावा विवि और कालेजों में शिक्षकों की पदोन्नति के लिए नए नियम भी तय किए हैं। इसके तहत कालेजों में पढ़ा रहे शिक्षक भी अब प्रोफेसर बन सकेंगे। अभी यह पदोन्नति के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर तक ही पहुंच पाते थे।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती को लेकर तैयार किए गए नए नियमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के भर्ती नियमों में यह बदलाव गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक कदम है। तीन सालों में इसकी पूरी तैयारी कर ली जाएगी।

इन नए बदलावों के बाद विश्वविद्यालय और कालेजों दोनों में शिक्षकों के भर्ती नियम अलग-अलग हो जाएंगे। अभी तक दोनों के ही नियम एक जैसे थे। नए बदलाव के बाद विवि में जहां सहायक प्राध्यापक के पद पर सीधी भर्ती के लिए नेट की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है, उसकी जगह पीएचडी को अनिवार्य बना दिया गया है।

वहीं कालेजों में मौजूदा नियमों के तहत सहायक प्राध्यापकों के पद पर होने वाली भर्ती में नेट और पीएचडी दोनों ही योग्यता को बरकरार रखा गया है। नए नियमों के तहत विवि और कालेजों में शिक्षकों की पदोन्नति के लिए नए नियम तैयार किए गए हैं।

इसके तहत अकादमिक परफार्मेंस इंडीकेटर (एपीआइ) बेस सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह विवि में नई ग्रेडेड पदोन्नति स्कीम लागू की गई है। इसके तहत जो शिक्षक जितना अच्छा पढ़ाएगा, उसे उतनी जल्दी प्रमोशन मिलेगा। वहीं कालेजों में पदोन्नति के लिए अब पीएचडी होना अनिवार्य कर दिया गया है।

विदेशी विवि से पीएचडी करने वालों को भी मौका-

विदेशी विवि से पीएचडी करने वालों को भी मौका देने के लिए भर्ती नियमों को शिथिल किया गया है। इसके लिए टाप रैकिंग वाले पांच सौ उच्च शिक्षण संस्थानों से पीएचडी करने वालों को ही यह मौका मिलेगा। इसके अलावा विवि और कालेजों में शिक्षकों की होने वाली नई भर्ती के लिए एक महीने का इंडक्शन प्रोग्राम करना जरूरी होगा।