फीरोजाबाद। पचपन वर्ष के रामचरित को तीन माह पूर्व हार्ट अटैक पड़ा तो डॉक्टर भी उनका परीक्षण कर चौंक गए। डायबिटीज रोगी के दिल की नसों में जगह-जगह ब्लॉकेज थे। स्थिति यह थी कि बाइपास सर्जरी भी संभव नहीं थी। ट्रॉमा सेंटर में 14 एंजियोप्लास्टी कर मरीज की जान पर मंडरा रहे खतरे को खत्म किया गया।

सेवार्थ संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ सर्जन डॉ. जितेंद्र सिह ने बताया कि मरीज के हृदय की नसें कई जगह पर इस कदर सिकुड़ चुकी थीं कि स्टंट डालना संभव नहीं था। इसके लिए वहां सिर्फ प्लेन बलून एंजियोप्लास्टी (पोबा) से नसों को चौड़ा किया जा सकता था।

डॉ. सिह ने बताया कि करीब पांच घंटे चली ऑपरेशन प्रक्रिया में तीन नसों में आठ स्टंट लगाए गए तथा दो-दो पोबा तीनों नसों में किए गए। इस तरह 14 एंजियोप्लास्टी हुई। एक तरह से मरीज के हृदय को पुनर्निमित किया गया है। लेफ्ट मेन नस की भी एंजियोप्लास्टी की गई है। उन्होंने बताया कि आर्थिक भार कम करने के लिए मरीज को स्टंट कंपनी से भी छूट दिलाई गई है।