जम्मू। ऑनलाइन गेम बच्चों व युवा पीढ़ी को अपना शिकार बना रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण है पबजी। जम्मू में एक फिटनेस ट्रेनर इस ऑनलाइन गेम की लत का शिकार होकर सुध-बुध खो बैठा और स्वयं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद उसे चिकित्सक के पास ले जाया गया।

हाल ही में पबजी गेम काफी लोकप्रिय हो रहा है। यह युवक भी लगातार इस गेम्स में ऐसा डूबा कि सुधबुध ही खो बैठा। गेम के लक्ष्य के लिए 99 स्कोर पाना आसान नहीं होता, लेकिन किशोरों का जुनून उनके दिलो दिमाग पर कुछ ज्यादा ही हावी हो रहा है।

जम्मू कश्मीर में यह फिटनेस ट्रेनर इस गेम की लत में फंसकर ऐसा खोया कि कई दिन तक लगातार उसी में डूबा रहा। इसके बाद भी वह टारगेट को प्राप्त नहीं कर सका। ऐसे में उसने स्वयं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। परिजन उसे चिकित्सक के पास लेकर गए। जहां उसकी सेहत में सुधार हुआ है। अब भी वह लत से पूरी तरह बाहर नहीं आया है।

बच्चे की गतिविधियों पर नजर रखें अभिभावक

मनोरोग अस्पताल जम्मू में एचओडी डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि ऐसे खतरनाक गेम पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है। अभिभावकों का भी दायित्व बनता है कि बच्चों पर नजर रखें। उनका बच्चा रात में क्या कर रहा है। पबजी गेम में बच्चा सोने का बहाना करता है, और जब सब सो जाते हैं तो गेम में कुछ और युवा जुड़ते जाते हैं। प्रतिस्पर्धा के इस युग में हार उन्हें बर्दाश्त नहीं होती जिससे उनकी जान पर बन आती है।

क्यों खतरनाक है यह गेम

यह गेम ऑनलाइन फ्री में उपलब्ध है और यह एक ऐसा बैटल ग्राउंड उपलब्ध करवाता है जिसमें स्वयं को बचाने के लिए जद्दोजहद चलती है। जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ता है इसके अनुसार रैंकिंग मिलती है। नतीजा खिलाड़ी इसमें बुरी तरह डूबने लगते हैं। इस गेम को खेलने वाले की मानसिकता ऐसी हो जाती है कि वह लक्ष्य पाने में विफल रहने पर खुद को बुरी तरह मारता और पीटता है। कई बार गंभीर रूप से घायल हो जाता है। कई बार बेहोशी के आलम में भी चला जाता है।

किशोर रात को ऑनलाइन होकर एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। इन किशोरों को गेम में सिर्फ रैंकिंग चाहिए। गेम का मकडज़ाल उन्हें इस कदर अपनी गिरफ्त में ले रहा है कि कई तो बीमार होने लगे हैं। हालांकि चीन और कई देशों ने इस गेम पर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन भारत में यह ऑनलाइन गेम काफी प्रचलित है। इससे पहले ब्लू वेल गेम ने भी युवाओं को भटका दिया था, जिससे कई की जान तक चली गई थी।