नई दिल्ली। मैसेजिंग एप वाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को बताया कि वह अपनी पेमेंट सेवा का परीक्षण कर रहा है। इस साल जुलाई तक इसके पूरा हो जाने की संभावना है।

भारतीय रिजर्व बैंक के मानकों को पूरा करने के बाद ही डाटा के स्थानीयकरण संबंधी वह अपनी पूर्ण पेमेंट सेवा को प्रारंभ करेगा।

शुक्रवार को गैरसरकारी संगठन सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टेमेटिक चेंज की याचिका पर जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस विनीत सरन की पीठ सुनवाई कर रही थी।

संगठन का दावा है कि वाट्सएप ने रिजर्व बैंक मानकों का पालन नहीं किया है। वाट्सएप की ओर से वकील कपिल सिब्बल और अरविंद दतार ने पीठ को बताया कि कंपनी अभी सिर्फ परीक्षण कर रही है। रिजर्व बैंक मानकों का पालन किए बिना वह अपनी सेवा प्रारंभ नहीं करेगी।

सीएएससी की ओर से अधिवक्ता विराग गर्ग ने कहा वाट्सएप को अपनी पेमेंट सेवा का परीक्षण 10 लाख यूजर्स पर करने की अनुमति प्रदान की गई है।

उन्होंने छह अप्रैल, 2018 के रिजर्व बैंक के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि यूजर्स के परीक्षण डाटा देश के बाहर रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशंस ऑफ इंडिया द्वारा वाट्सएप को दी गई यह अनुमति उल्लंघकारी हो सकती है।