पूर्वी सिंहभूम। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के सुदूर पिछड़े पटमदा प्रखंड के लावा गांव की परी सिंह अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर एक दिन के लिए ऑस्ट्रेलिया की राजदूत बनाई गई। उसका चयन प्लान इंडिया, नवभारत जागृति केंद्र व यूनीसेफ के सहयोग से संभव कार्यक्रम के तहत हुआ है।

पटमदा की बेटी परी सिंह देश की उन 16 लड़कियों में अपना स्थान बनाने में सफल रही हैं, जिन्हें इस प्रतीकात्मक जिम्मेदारी के लिए चुना गया है। परी अभी जमशेदपुर के साकची स्थित ग्र्रेजुएट कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई के दौरान ही परी सिंह पटमदा में यूनीसेफ से जुड़ गई थीं। उनके उल्लेखनीय सामाजिक योगदान के लिए 2017 में उन्हें एक दिन के लिए बीडीओ (प्रखंड विकास पदाधिकारी)भी बनाया गया था।

टाटा मोटर्स में चालक हैं पिता

परिवार में दो बहनों व एक भाई में परी मंझली है। उनके पिता रसराज सिंह जमशेदपुर में टाटा मोटर्स कंपनी में चालक हैं। उसकी मां छबि रानी सिंह गृहिणी है। मां का कहना है कि बेटी के बढ़ते कदमों से कुछ नई आशा की किरण जगती है।

प्लान इंडिया ने दिल्ली में दी ट्रेनिंग

परी समेत चयनित 16 लड़कियों को नई दिल्ली में प्लान इंडिया संस्था ने तीन दिवसीय ट्रेनिंग देकर बुनियादी जानकारी प्रदान की है। परी का कहना है कि गरीब परिवार में रहने के कारण कुछ विशेष करने की इच्छा थी। वह आगे चलकर एक जिम्मेदार पद पर जाना चाहती हैं, जिससे उनके माता पिता व क्षेत्र का नाम रोशन हो सके।

परी ने बताया कि गांव में यूनीसेफ से जुड़कर समाज सेवा के कार्य को आगे बढ़ाया है। इसके बाद यूनीसेफ ने उसे बैंक मित्र के रूप में चुना। 11 अक्टूबर, 2017 को एक दिन का बीडीओ बनने का सौभाग्य मिला। उनका कहना है कि यह सम्मान पाकर वह बेहद खुश हैं। एक दिन का राजदूत बनने से यह पता चल सकेगा कि दूसरे देशों से भारत का रिश्ता कैसा है?