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    यहां श्मशान में अस्थियों की सुरक्षा के लिए चिता पर लगा देते हैं ताले

    Published: Mon, 04 Dec 2017 08:04 AM (IST) | Updated: Mon, 04 Dec 2017 08:09 AM (IST)
    By: Editorial Team
    pyre 04 12 2017

    राजेश शर्मा, लुधियाना। गिरी हुई इंसानी फितरत की इंतहा है यह दास्तां। मरने के बाद भी मानव अस्थियों व उसकी राख को ताले की जरूरत पड़ने लगी है। आप विश्वास नहीं करेंगे, लेकिन यह सच है। पंजाब में लुधियाना के शाम नगर स्थित शांति वन श्मशान घाट में चोरी के डर से अंतिम संस्कार के बाद मानव अस्थियों व राख तक को ताले में रखा जा रहा है।

    शाम छह बजे परिजनों के सामने ही अस्थियों व राख पर पिंजरानुमा जंगला लगाकर ताला जड़ दिया जाता है। चाबी परिजनों के हवाले कर दी जाती है। चौथे की रस्म पर अस्थियां उठाने के बाद ही पिंजरा हटाया जाता है। यही नहीं श्मशान घाट में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।

    शांति वन प्रबंधन कमेटी के स्वामी अरुण अत्री ने बताया कि कुंवारों व गर्भवतियों के संस्कार के बाद कई परिजन खास तौर पर सावधानी बरतते थे। तांत्रिक क्रिया का खतराहालांकि प्रबंधन ने सुरक्षा का विशेष इंतजाम कर रखे हैं। इसके बाद भी कई परिजन खास तौर पर दिवाली वाले दिन खुद पहरा देने पर अड़ जाते थे। उनका तर्क था कि ऐसे केस में तांत्रिक अस्थियों को तंत्र के लिए उपयोग कर सकते हैं।

    ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ही चिता पर लोहे का पिंजरा रखकर उस पर ताला लगाने की तरकीब निकाली गई। स्वामी अरुण अत्री ने बताया कि एक बार रात को दो बजे एक महिला श्मशान घाट की दीवार फांद कर जल रही चिता के पास बैठ गई थी। पूछताछ में महिला ने बताया कि एक तांत्रिकने उसे उपाय बताया कि यदि वह जलती चिता के पास बैठकर पाठ करेगी तो घर में चल रहा विवाद खत्म हो जाएगा। इस मामले में पुलिस में रिपोर्ट तक दर्ज करवानी पड़ी थी।

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