नई दिल्ली। भारतीय कूटनीति के लिहाज से अगले चार दिन बेहद गहमा गहमी वाले होंगे। पीएम नरेंद्र मोदी अपनी कार्यशैली के मुताबिक इन चार दिनों में स्वीडन, ब्रिटेन व जर्मनी की यात्रा करेंगे। वहां उनकी सात देशों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। इसके अलावा मोदी नोर्डिक समूह के सम्मेलन और राष्ट्रमंडल देशों की सरकारों के सम्मेलन (चोगम) में हिस्सा लेंगे, जहां उनकी कुछ दूसरे देशों के प्रमुखों के साथ भी द्विपक्षीय बैठक होगी।

स्वीडन में मोदी नोर्डिक देशों के पांचों सदस्य देशों नार्वे, फिनलैंड, हालैंड, आइसलैंड व स्वीडन के प्रमुखों के साथ अलग-अलग भी मिलेंगे और फिर इनके साथ एक संयुक्त बैठक भी करेंगे। ब्रिटिश पीएम टेरीजा मे और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के साथ मोदी की मुलाकात पर रूस, अमेरिका समेत अन्य देशों की भी नजर होगी।

पीएम नरेंद्र मोदी सोमवार को स्टाकहोम के लिए रवाना हुए हैं। वहां एक दिन गुजारने के बाद वह दो दिन ब्रिटेन में रहेंगे जबकि वहां से लौटते वक्त जर्मनी में छह घंटे का संक्षिप्त आधिकारिक दौरा करेंगे। पहले इस यात्रा में जर्मनी शामिल नहीं था, लेकिन चासंलर मर्केल के अनुरोध पर इसे शामिल किया गया है। मोदी की इन तीनों देशों की यात्रा की अपनी अपनी अलग अहमियत होगी।

नोर्डिक क्षेत्र के पांचों देशों ने इस तरह की संयुक्त बैठक इसके पहले सिर्फ एक बार अमेरिका से की थी। दूसरी बैठक भारत के पीएम के साथ की जा रही है।

इसी तरह से राष्ट्रमंडल देशों की बैठक में बेहद व्यस्त होने के बावजूद ब्रिटिश सरकार ने पूरा एक दिन पीएम मोदी के लिए निकाला है। 18 अप्रैल, 2018 को टेरीजा मे के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने के साथ ही मोदी वहां के राजघराने के सदस्यों के साथ भी वक्त गुजारेंगे और दिन भर में कई कार्यक्रमों में भारत व ब्रिटेन के रिश्ते को मजबूती देने वाले दर्जनों लोगों से भी मिलेंगे।

उल्लेखनीय है कि चोगम की बैठक में आने वाले 52 देशों के प्रमुखों में से ब्रिटेन ने सिर्फ पीएम मोदी के साथ ही द्विपक्षीय बैठक करने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक जर्मनी के दौरे का अपना महत्व होगा क्योंकि मर्केल के दोबारा चासंलर बनने के बाद मोदी किसी प्रमुख देश के पहले पीएम हैं जो जर्मनी की यात्रा पर जा रहे हैं। मर्केल खुद भी भारत के साथ संबंधों को गंभीरता से लेती हैं।