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    तीन मूर्ति का नाम बदलकर हुआ तीन मूर्ति हाइफा चौक, इजरायल से है वर्षों पुराना नाता

    Published: Sun, 14 Jan 2018 01:05 PM (IST) | Updated: Sun, 14 Jan 2018 04:25 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। 15 सालों के बाद छह दिवसीय भारत दौरे पर दिल्ली पहुंचे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली एयरपोर्ट पर स्वागत किया। इसमें खास बात यह है कि पीएम मोदी प्रोटोकॉल को तोड़कर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का स्वागत किया।

    आपको बता दें कि यात्रा के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू तीन मूर्ति मेमोरियल पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इजरायल के प्रधानमंत्री के भारत आने से पहले ही तीन मूर्ति चौक और तीन मूर्ति मार्ग का नाम बदल दिया गया था। अब इसे तीन मूर्ति हाइफा चौक और तीन मूर्ति हैफा मार्ग के तौर पर जाना जाएगा। हाइफा इस्राइल के एक शहर का नाम है।

    आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक दोनों नेता तीन मूर्ति मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और स्मारक की विजिटर्स बुक पर हस्ताक्षर करेंगे। तीन मूर्ति पर मौजूद तीन कांस्य मूर्तियां हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लांसर्स का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो 15 इम्पीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का हिस्सा है।

    तीन मूर्ति और इजरायल का वर्षों पुराना रिश्ता -

    इस ब्रिगेड ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 23 सितंबर 1918 को हाइफा पर विजयी हमला किया था। इसे विजयी हमला इसलिए कहा गया क्योंकि मुस्लिम तुर्कों से फिलिस्तीनी लोगों की मुक्ति के लिए भारत के तीन राज्य (जोधपुर, हैदराबाद और मैसूर) से इजरायल में सैनिक भेजे गए थे। भारतीय सैनिकों ने इसके लिए इजरायल के हाइफा शहर में युद्ध किया। इस युद्ध से जुड़े सभी विभिन्न पहलू वीरता का वर्णन करते हैं। जब लांसर्स ने ओटोमन (उस्मानी साम्राज्य),जर्मनी और ऑस्ट्रिया-हंगरी के संयुक्त बल द्वारा संरक्षित गैरीसन शहर पर हमला किया।

    हाइफा की मुक्ति ने समुद्र के माध्यम से मित्र राष्ट्रों के लिए आपूर्ति मार्ग को मंजूरी दी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा की आजादी के लिए 44 भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों का बलिदान किया। अब तक से ही 61 कैवलरी 23 सितंबर को जयंती दिवस या 'हाइफा दिवस' के रूप में मनाते हैं।

    भारत और इजरायल के बीच संबंध -

    - 1990 से ही भारत और इसराइल के बीच सैन्य संबंध सबसे अहम रहे हैं।

    - बीते एक दशक में दोनों देशों के बीच 670 अरब रुपए का कारोबार हुआ।

    - मौजूदा समय में भारत सालाना करीब 67 अरब से 100 अरब रुपए के सैन्य उत्पाद इजरायल से आयात कर रहा है।

    - 1992 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत हुई।

    - इजराइल की हथियार बेचने की मंशा ने भी दोनों देशों के बीच रिश्ते को मज़बूती दी।

    - इसमें 1999 के करगिल युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए लेजर गाइडेड बम और मानवरहित हवाई वाहन शामिल रहे हैं।

    - संकट के समय भारत के अनुरोध पर इजराइल हमेशा मदद के लिए आगे आया और भारत के लिए भरोसेमंद हथियार आपूर्ति करने वाले देश के तौर पर स्थापित किया।

    - आज भी भारत इजरायल से काफी हथियार खरीदता है।

    - मौजूदा समय में भी इजराइल बड़ी मात्रा में भारत को इजराइल मिसाइल, एंटी मिसाइल सिस्टम, यूएवी, टोह लेने वाली तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और गोला-बारूद मुहैया कराता है।

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