गोरखपुर। देवरिया के बालिका गृह से देह व्यापार रैकेट संचालित होने के मामले ने आम जन से लेकर शासन तक को झकझोंर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद पूरे राज्य में इस तरह के शल्टर होम्स की जांच की जा रही है।

इस बीच जिले के डीएम को हटाने के बाद सरकार ने डिस्ट्रिक्ट प्रोबेशन ऑफिसर को भी बर्खास्त कर दिया है। जिले के नए डीएम अमित किशोर ने बताया कि, इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जल्द ही बाकी लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। डीपीओ ने गलती की, क्योंकि शेल्टर होम का लायसेंस पिछले साल ही निरस्त किया गया था, लेकिन इसके बाद भी लड़कियों को शेल्टर होम भेजा जाता था।

इससे पहले पुलिस ने इस मामले में संचालिका व उसके पति को गिरफ्तार करने के बाद उनकी बेटी के अलावा संस्था की अधीक्षक कंचनलता को भी मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार की देर शाम देवरिया पुलिस ने लखनऊ में अधीक्षक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की थी।

मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के द्वारा संचालित बाल गृह बालिका, बाल गृह शिशु, विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण एवं स्वाधार गृह देवरिया की मान्यता को शासन स्थगित करने के बाद भी संस्था में बालिकाएं, शिशु व महिलाओं को रखा जा रहा था। रविवार की रात इस संस्था से सेक्स रैकेट संचालित होने का खुलासा होते ही शासन गंभीर हो गया।

इस मामले में तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार की तहरीर पर पुलिस ने अधीक्षक कंचनलता, उसकी मां व संचालिका गिरिजा त्रिपाठी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। सोमवार को गिरिजा त्रिपाठी व मोहन त्रिपाठी को पुलिस ने जेल भेज दिया।

सोमवार को कंचनलता का लोकेशन पुलिस के लखनऊ में मिला तो दो टीमें रवाना की गई और टीमों ने छापेमारी भी की। लेकिन संबंधित स्थान पर वह नहीं मिली। मंगलवार की सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसे पुलिस लाइन में रखकर पूछताछ की जा रही है। अधीक्षक का कहना है कि सारे आरोप बेबुनियाद है। उसके यहाँ से कोई लड़की गायब नही है।

देवरिया बाद कई जगह छापेमारी

देवरिया प्रकरण के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। 20 से अधिक जिला स्तरीय अफसरों ने कस्तूरबा आवासीय विद्यालय, नारी सरंक्षण केंद्र, वृद्धा आश्रम पर छापा मारा। कई स्थानों पर खामियां मिलने की जानकारी मिली थी। मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है।