वाराणसी। आंखें फटी थी और दिल कतई मानने को तैयार नहीं था कि क्या ये वही गंगा के घाट हैं जिन्हें देखकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कुछ यूं अभिभूत हुए कि तारीफ करते उनके शब्द कम पड़ गए। प्रधानमंत्री को नौका विहार कराने के लिए उन्होंने आभार भी प्रकट किया। सोमवार को चमक रहे गंगा के घाट मंगलवार को सुबह बेबस और बेजार से दिखे। आठ बजे घाटों पर तिरंगा व फ्रांस के झंडे पड़े थे। सीढ़ियों पर कूड़े का ढेर हर बदहाली की कहानी कह रहा था। गंगा के आंचल में माला-फूल प्रवाहित थे।

घाट के नीचे फिर से छुट्टा पशु लोट रहे थे। वे गोबर से घाटों को गंदा करते दिखाई पड़े। दोपहर एक बजे अस्सी घाट पर जमा कूड़ा साफ तो हुआ था लेकिन, उसे उठाया नहीं जा सका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व फ्रांस के राष्ट्रपति के दोस्ती की गवाह बनी भारी-भरकम होर्डिंग जमीन पर पड़ कर धूल फांक रही थी। फिर से नींबू की चाय बिक रही थी। घाट की सीढ़ियों पर दूषित मटमैला पानी बदबू फैला रहा था।

जिस बजड़े पर पीएम, फ्रांसीसी राष्ट्रपति और सीएम ने 38 घाटों की सैर की, वह किनारे खड़ा था। कुछ युवा उसकी सेल्फी जरूर ले रहे थे लेकिन, उसके फूल धूप में मुरझा चुके थे। घाट पर फिर से गंदगी का आलम था। अव्यवस्था सिस्टम के गाल में तमाचे मार रहा था। घाट ही नहीं शहर भी आज तड़प रहा था। कल तक फर्राटा भर रहे लोग प्रेशर हार्न के शोर से परेशान थे। जाम और अतिक्रमण से ट्रैफिक रेंग रहा था। कमोबेश शहर के सभी मार्ग जाम की चपेट में रहे। जाम के हालात के चलते हर कोई प्रशासन को कोसता हुआ दिखा।

इसमें स्थानीय लोग भी कम नहीं जिम्मेदार हैं। पीएम के स्वागत के लिए लगाए गए गमले या तो चोरी हो गए या फिर बेरहमी से तोड़ दिए गए। काले-पीले पेंट से चमकाए गए डिवाइडर फिर से पान की पीक से बदरंग होने लगे हैं। अतिक्रमण का बाजार फिर से पांव पसारने लगा है जिसके चलते चौड़ी सड़कें भी संकरी हो गई हैं।