प्रयागराज। ध्वज-पताका की अदभुत छटा, भांगड़ा-गिद्दा के मनोरम नृत्य के बीच भगवा वस्त्रधारी महात्माओं का कारवां सड़क पर निकला तो लोगों की आस्था हिलोर मारने लगी। श्रद्धा व भक्तिभाव से ओतप्रोत नर-नारी व बच्चों के शीश आशीष पाने की कामना के साथ संतों के आगे झुक गए। सड़क किनारे, घरों की छतों पर खड़े लोगों ने संतों पर पुष्पवर्षा कर हाथ जोड़कर आशीष लिया।

यह दृश्य था श्रीपंचायती अखाड़ा नया उदासीन की पेशवाई का। बैंडबाजा, ध्वज-पताका के साथ पैदल चल रहे महात्मा व चांदी के सिंहासन पर आसीन महामंडलेश्र्वरों पर सबकी आंखें टिकी रहीं। अखाड़ा की पेशवाई गुरुवार की सुबह मुट्ठीगंज स्थित मुंशीराम बगिया से आरंभ हुई। सबसे आगे अखाड़ा के आराध्य श्रीचंद्र भगवान की चांदी की पालकी चल रही थी।

पालकी के पीछे अखाड़ा की ध्वज-पताकाएं तथा महात्माओं का लंबा काफिला था। फूलों से सजे रथ पर चांदी के सिंहासन पर अखाड़ा के महामंडलेश्र्वर सूरजमुनि, महामंडलेश्र्वर डॉ. शांतानंद विराजमान रहे। इनके अलावा अखाड़ा के मुखिया महंत भक्तराम, महंत धुनि दास, महंत अग्रदास, महंत मंगलमुनि, महंत चंद्रमुनि पेशवाई की शोभा बढ़ा रहे थे।

विभिन्न मार्गों से होता हुआ कारवां त्रिवेणी रोड बांध होते हुए सेक्टर 16 स्थित अखाड़ा के शिविर पहुंचा। वहां आराध्य की पालकी को पूजन कर धर्मध्वजा के पास स्थापित किया गया। इसके बाद महात्मा अपना शिविर दुरुस्त करने में जुट गए।