जम्मू। आतंकवाद की कमर तोड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले राज्य पुलिस के विशेष अभियान दल (SOG) को जम्मू संभाग के हर जिले में फिर से पूरी तरह सक्रिय बनाने के लिए राज्य प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि कश्मीर घाटी के प्रत्येक जिले और कस्बे में SOG पूरी तरह क्रियाशील है, लेकिन जम्मू संभाग में सिर्फ जम्मू जिले में ही यह सक्रिय है। हालांकि अन्य जिलों में SOG में डीएसपी ऑपरेशन तैनात हैं, लेकिन वह पूरी तरह सक्रिय नहीं हैं।

SOG को पुलिस की शब्दावली में पुलिस कंपोनेंट भी कहते हैं। आचार संहिता खत्म होते ही इसे लागू करने की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। SOG का गठन 1994 में श्रीनगर में किया गया था। तत्कालीन SP फारुक खान इसके पहले मुखिया थे और शुरू में मात्र 45 पुलिसकर्मी और अधिकारी ही इसमें शामिल थे। बाद में हर जिले में SOG का एक यूनिट बनाया गया और लगभग एक डेढ़ हजार के करीब इसमें जवान और अधिकारी तैनात किए गए।

SOG को कभी भी पुलिस संगठन में एक अलग विंग की मान्यता नहीं रही और यह जिला पुलिस के अधीनस्थ काम करने वाला एक आतंकरोधी विंग रहा। जिला स्तर पर SSP इसका प्रमुख होता है और अतिरिक्त जिला एसपी संबंधित जिले में SOG के ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार रहते थे। कई जिलों में DSP रैंक को यह जिम्मेदारी दी जाती रही।

2003 में तत्कालीन पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार के दौर में इसे बंद करने का ऐलान किया गया। हालांकि कश्मीर में यह पहले की तरह ही सक्रिय रही और जम्मू संभाग में जैसे-जैसे हालात सुधरते गए इसकी संबंधित यूनिट बंद होती गईं। इसमें तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को उनके मूल विंग्स में तैनात किया जाता रहा।

राज्य गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जम्मू संभाग में जिस तरह से बीते कुछ महीनों से आतंकी गतिविधियां तेज हुई हैं, किश्तवाड़, रामबन, रियासी, गूल, रामबन, राजोरी-पुंछ, भद्रवाह, डोडा और जम्मू में आतंकी संगठन अपने लिए कैडर तलाशने लगे हैं, वारदात कर रहे हैं, उसे देखते हुए ही प्रत्येक जिले में SOG का फिर से खड़ा करने का फैसला लिया गया है।