नई दिल्ली। आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को दस फीसद आरक्षण देने के विधेयक को लेकर सरकार बिल्कुल भी देरी के मूड में नहीं है। वजह शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश की अगले महीने से शुरू होने वाली प्रक्रिया है। इससे पहले ही वह इससे जुड़ी सारी औपचारिकताओं को पूरा कर लेना चाहती है, ताकि इस वर्ग को इसका लाभ इसी सत्र से दिया जा सके।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विधेयक पर राज्यसभा के सभापति के हस्ताक्षर के लिए उसे नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) भेजा गया, जहां वह इन दिनों मौजूद है। राष्ट्रपति द्वारा इस बिल को मंजूरी दे दी गई है।

विधेयक लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा से पारित हो गया था लेकिन चूंकि सभापति वेंकैया नायडू दिल्ली में नहीं थे इस कारण उनका हस्ताक्षर नहीं हो पाया था। इसके चलते विधेयक को एक विशेष संदेशवाहक के जरिए उसे नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) भेजा गया।

उप राष्ट्रपति इन दिनों अपने परिवार के किसी सदस्य के निधन के बाद गए यहां आए हुए है। कोशिश है कि इसको लेकर जल्द नियम-कायदे तय कर नोटीफिकेशन जारी कर दिया जाए। ताकि अगले एक महीने में शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र में इस वर्ग से जुड़े लोगों को इसका लाभ भी मिल जाए।