बेगूसराय : मोरारी बापू ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर कहा कि इस पर उनका पहले से ही एक स्टैंड है। राम मंदिर अयोध्या में बने, लेकिन संवाद से बनना चाहिए, विवाद से नहीं। सबको आदर देते हुए, सबका सम्मान करते हुए वहां राममंदिर बनना चाहिए क्योंकि वहां इसके प्रमाण भी मिले हैं। स्वाभाविक है करोड़ों लोगों की श्रद्धा का यह स्थान है तो संवाद से सभी काम होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि अब अदालत किस कारण से विलंब कर रही है, मुझे जानकारी नहीं, लेकिन विलंब तो हो ही गया। अदालत जो सोचती है वह सोचे, राजनीति जो सोचती है सोचे। मेरा यही कहना है कि साथ में मिलकर सबको समझाकर संवाद कर ध्वजा फहराना चाहिए। वह बिहार के भागलपुर स्थित सिमरिया में अपनी कैलाश कुटिया में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। कहा कि जहां देवत्व है, वहां सब स्वीकार होना चाहिए। मंदिर में, सत्संग में स्वीकार्यता होना चाहिए। प्यार व सम्मान के साथ प्रसाद स्वीकार करो।

प्रसाद का बिगाड़ नहीं करो, इधर-उधर स्वच्छता भंग न करो। गंगा तट को भी और हमारे अगल-बगल भी स्वच्छता का ध्यान रखो। कहा, आपको प्रसन्नता होगी कि अहमदाबाद में मैंने नौ दिन कथा की। केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान और इसमें पक्ष या विपक्ष से मेरा कोई लेना-देना नहीं। लेकिन महात्मा गांधी के विचारों के कारण मैंने पूरे नौ दिन स्वच्छता के लिए कथा कही। सिमरिया की रामकथा और अन्य जगह की रामकथा के सवाल पर कहा कि हर कथा मौलिक होती है, नई होती है। जैसे गंगा रोज नई है, वैसे ही कथा भी गंगा है।