नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। राजपथ पर परेड देखने की बात कहते ही प्रकाशी तोमर (75) की आंखें खुशी से चमक उठती हैं। वह कहती है कि उन्होंने टीवी पर ही परेड को देखा है। जीवन में पहली बार लाइव परेड देखेंगी। बागपत की राष्ट्रीय निशानेबाज प्रकाशी तोमर को महिला व बाल विकास मंत्रालय ने परेड देखने के लिए विशेष तौर पर आमंत्रित किया है। उन्हें मंत्रालय ने 100 वुमन अचीवर्स में भी जगह दी है।

हाल ही में मंत्रालय ने उन्हें सम्मानित किया तो 22 जनवरी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दिए गए भोज में वह शामिल हुईं। प्रकाशी तोमर ने जो इतिहास गढ़ा है वह किसी और के लिए सपना ही है। गृहस्थी के साथ खेतीबाड़ी संभालने वाली बागपत (उत्तर प्रदेश) के जोहड़ी गांव की प्रकाशी ने 60 साल की उम्र में पहली बार बंदूक को हाथों में लिया।

राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदकों पर जमकर निशाना साधा। उनके इस कारनामे को देखकर फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने उनकी फोटो साझा की। प्रकाशी के घर में ही बेटी से लेकर पोती तक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज हैं।

जोहड़ी गांव शूटिंग के लिए उर्वरा जमीन है। इस कारण भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने वहां शूटिंग रेंज खोली है। प्रकाशी ने भी खुद की भी शूटिंग रेंज खोली है, जहां वह गांव की युवतियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। प्रकाशी ने जागरण से बातचीत में बताया कि जब वह 60 साल की थी, तो गांव में एक निजी शूटिंग रेंज खुली।

इसमें उनकी बेटी और पोती शूटिंग सीखने जाती थीं। एक बार ऐसे ही मजाक-मजाक में उन्होंने बंदूक हाथ में लिया, गोली निशाने पर लगी। फिर शुरू हो गया निशानेबाज बनने का सफर। वह बताती हैं कि शुरुआत में गांव में उनका मजाक उड़ाया जाता था। लोग ताने देते थे कि बुढ़िया इस उम्र में कारगिल जाएगी।

उन्होंने प्रयास जारी रखा और निशाना सटीक लगाने के लिए हाथ में रोजाना पानी भरा जग लेकर अभ्यास करने लगीं। तब पति भी मजाक उड़ाते थे, लेकिन अब वक्त ऐसा आया है कि लोग सम्मान से उन्हें कार्यक्रमों में बुलाते हैं।

उन्होंने राज्य स्तर की कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतने के अलावा दो बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीता है। वह कहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पर गांव में शूटिंग का और बेहतर माहौल बनाने की मांग करेंगी।