मुंबई। अमीर-गरीब के बीच दुनियाभर में चौड़ी होती खाई की चिंताओं के बीच एक ताजा अध्ययन का कहना है कि पिछले वर्ष धनकुबेर परिवारों की तादाद में 12 फीसद की दर से इजाफा हुआ है। हालांकि अध्ययन के मुताबिक उन सभी धनकुबेर परिवारों के कुल धन में मात्र पांच फीसद की दर से बढ़ोतरी हुई है।

कोटक वेल्थ मैनेजमेंट रिपोर्ट के मुताबिक अति धनवान परिवारों (जिनका नेटवर्थ 25 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा है) की संख्या पिछले वर्ष 12 फीसद बढ़कर 1.67 लाख पर पहुंच गई। हालांकि इस दौरान उनकी कुल संपत्ति महज पांच फीसद इजाफे के साथ 153 लाख करोड़ रुपये रही। रिपोर्ट में यह उम्मीद भी जताई गई है कि अगले पांच वर्षों में ऐसे धनकुबेर परिवारों की संख्या 3.30 लाख और उनकी कुल संपत्ति 352 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगी।

कोटक वेल्थ की यह रिपोर्ट इस मामले में भी खास है क्योंकि इससे पहले फ्रांस के अर्थशास्त्रियों थॉमस पिकेती और लुकास चांसेल ने वर्ष 2017 में और इस वर्ष वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से ठीक पहले गैर-लाभकारी संस्था ऑक्सफैम ने भी दुनियाभर में अमीर-गरीब के बीच बढ़ती खाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। एक तरफ फ्रांस की अर्थशास्त्री जोड़ी का कहना था कि वर्ष 1991 के बाद हुए आर्थिक सुधारों के बाद आर्थिक विषमता की खाई चौड़ी हुई है। दूसरी तरफ ऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया की 73 फीसद संपत्ति पर दुनिया की शीर्ष एक फीसद धनकुबेर आबादी का कब्जा है।

अपनी रिपोर्ट के बारे में कोटक वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जयदीप हंसराज का कहना था कि रिपोर्ट में आर्थिक विषमता के पहलू पर विचार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि "हमने सिर्फ इन पहलुओं को ध्यान में रखा है कि ये नए धनकुबेर निवेश कहां करेंगे, खर्च कहां करेंगे और उनकी दिशा किस तरफ रहेगी। हमने आर्थिक विषमता जैसे पहलुओं को नहीं छुआ है।" हंसराज ने कहा कि इन नए धनकुबेर परिवारों का फोकस गोल्ड या रियल एस्टेट जैसी भौतिक संपत्तियों में निवेश करने पर नहीं, बल्कि वित्तीय संपत्तियों में निवेश करने पर रहेगा।