लखनऊ। राज्यसभा टिकट न मिलने से नाराज नरेश अग्रवाल का जाना समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका जरूर है लेकिन, प्रदेश की सत्ता से हटते ही यह सिलसिला शुरू हो गया था। भाजपा सरकार बनने के बाद एक-एक कर कई ऐसे नेताओं ने सपा का साथ छोड़ा जो पार्टी के मजबूत स्तंभ माने जाते थे। रणनीतिक रूप से इन सभी का लाभ भाजपा ने उठाया और इस बार वह नरेश अग्रवाल में सियासी लाभ देख रही है।


समाजवादी पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद वैसे तो कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी लेकिन, अखिलेश को सबसे अधिक झटका उन नेताओं ने दिया जिन पर पार्टी ने विशेष अनुग्रह करते हुए उच्च सदन भेजा था। ऐसे नेताओं में सबसे पहले यशवंत सिंह और बुक्कल नवाब ने पार्टी छोड़ी। यशवंत ने हालांकि इसके संकेत पहले ही दे दिए थे लेकिन, बुक्कल नवाब अपने परिस्थितियों से मजबूर हुए। इसके बाद विधान परिषद सदस्य मेरठ की सरोजनी अग्रवाल ने सपा से नाता तोड़ा। सभी नेताओं ने सपा छोड़ने से पहले मुलायम की उपेक्षा को ही कारण बताया था। इन इस्तीफों की चर्चा थमी भी नहीं थी कि सपा सरकार में मंत्री रहे और मुलायम सिंह के करीबी माने जाने वाले अशोक वाजपेयी ने भी विधान परिषद की सदस्यता छोड़ दी। यह सपा के लिए चौथा बड़ा झटका था।

सपा नेताओं के ये इस्तीफे भाजपा को मुफीद आते थे इसलिए परदे के पीछे इनकी कथा भी उसी ने लिखी। इनसे रिक्त सीटों पर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा और स्वतंत्र देव सिंह उच्च सदन में पहुंचे। अब नरेश अग्रवाल को पार्टी में लेकर भाजपा ने हरदोई का भी गणित ठीक किया है। सपा से भाजपा में आए नरेश और अशोक वाजपेयी दोनों ही हरदोई के ही रहने वाले हैं और आगामी लोकसभा चुनाव के नजरिए से यह गणित भाजपा के लिए लाभदायक है। अशोक बाजपेयी को राज्यसभा का टिकट देकर पार्टी ने सपा से उनकी बगावत का इनाम दे ही दिया है।