लखनऊ। गोरखनाथ मंदिर में चल रही राष्ट्रीय संत सभा की चिंतन बैठक में गोरक्षपीठाधीश्र्वर व सदर सांसद महंत योगी आदित्यनाथ को राम मंदिर निर्माण शुरू कराने के लिए उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया गया।

भाजपा को नसीहत देते हुए कई संतों ने साफ कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट से मंदिर निर्माण के पक्ष में निर्णय आता है तो सपा-बसपा की सरकार रहते निर्बाध रूप से मंदिर का निर्माण संभव नहीं हो पाएगा। इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बने और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री।

बैठक श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण, धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाने, समान नागरिक संहिता लागू करने, गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और मां गंगा की पुनर्प्रतिष्ठा जैसे विविध हिदू समाज की चुनौतियों व उनके समाधान पर केंद्रित रही। वक्ताओं ने समता व सामाजिक समरसता पर विशेष बल दिया।

चिंतन बैठक के अंतिम दिन बुधवार को चर्चा की शुरुआत करते हुए दिगंबर अखाड़ा अयोध्या के महंत सुरेश दास ने भाजपा का आह्वान किया कि वह मंदिर निर्माण के लिए आगे आए। भाजपा नेतृत्व से उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत करने की मांग की। इस मांग का धर्मसभा के अध्यक्ष गोविन्द देव गिरी, महामंडलेश्र्वर विश्र्वेश्र्वरदास सहित अनेक संतों ने समर्थन करते हुए योगी को सम्मानित किया।

स्वामी गोविन्द देव गिरी ने कहा कि यद्यपि संत सभा का कार्य मुख्यमंत्री कौन हो, यह घोषित करना नहीं है, किंतु इसमें कोई संदेह नहीं कि मंदिर निर्माण के लिए जो अपना सबकुछ दांव पर लगा दे, जो उसके लिए प्रतिबद्ध हो, संत सभा व उसके संत उसी के पीछे खड़े हैं और खड़े होंगे।

अध्यक्षता करते हुए स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि संतसभा राजनीतिकमंच नहीं है तथापि सत्ता को हम निरंकुश नहीं होने दे सकते। महामंडलेश्र्वर स्वामी विश्र्वेश्र्वरानंद ने कहा, "समान नागरिक संहिता" भारत की एकता-अखंडता की आवश्यक शर्त है। दुग्धेश्र्वरनाथ मंदिर, गाजियाबाद के महंत महामंडलेश्र्वर नारायण गिरि ने कहा कि गांव-गांव में संत सामाजिक समरसता का मंत्र लेकर जाएं।

आभार ज्ञापित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संत राष्ट्र जागरण का हिस्सा बनें। वर्तमान युग में हिंदू समाज की रक्षा के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों परंपराओं का संत वाहक बनें। एक हाथ में लोटा तो दूसरे में सोटा हो, एक हाथ में खप्पर तो दूसरे हाथ में दंड धारण करें।

भाजपा नेतृत्व पर बढ़ा दबाव

मुख्यमंत्री के तौर पर चेहरे को लेकर पहले से ही उधेड़बुन में फंसे भाजपा नेतृत्व पर इस बात के लिए दबाव बढ़ गया है कि वह राम मंदिर के लिए प्रतिबद्ध हिंदुत्व विचारधारा के व्यक्ति को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करे और इसके लिए सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम सामने आया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद का कहना है कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश कर विधान सभा चुनाव लड़ने की मांग उनकी व्यक्तिगत मांग नहीं है बल्कि यह संत समाज की इच्छा है। इससे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी अवगत करा दिया गया है।

राम की प्रेरणा से होगा मंदिर निर्माण

संसार में जो भी सुंदर है वही राम है। राम सांप्रदायिक मिथक नहीं हैं और न ही धर्म विशेष के द्योतक हैं। रा का मतलब है राष्ट्र और म का अर्थ है मंगल। यानी राम राष्ट्र मंगल के परिचायक हैं। राम की प्रेरणा से ही मंदिर निर्माण होगा।

यह उद्गार हैं, प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ एवं पद्मभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य के। वह बुधवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के श्रीराम शोध पीठ में आयोजित व्याख्यान के बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि रामायण में सार्वभौमिक समस्याओं का समाधान निहित है।