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    कठुआ केस: सुप्रीम कोर्ट का जम्मू-कश्मीर सरकार को नोटिस

    Published: Mon, 16 Apr 2018 12:47 PM (IST) | Updated: Mon, 16 Apr 2018 09:37 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार को कठुआ सामूहिक दुष्कर्म कांड में पीड़िता के परिवार, उनकी वकील और केस की पैरोकारी में मदद करने वाले पारिवारिक मित्र को सुरक्षा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई जम्मू में कठुआ से चंडीगढ़ स्थानांतरित करने की पीड़िता के पिता की मांग पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को यह आदेश पीड़िता के पिता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किए। इससे पहले पीड़िता के पिता की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील इंद्रा जयसिंह ने कहा कि यह याचिका पीड़िता के जैविक पिता की ओर से दाखिल की गई है।

    यह मामला आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या का है। मामले की निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए और जम्मू के मौजूदा हालात में वहां निष्पक्ष सुनवाई होना मुमकिन नहीं है। यहां तक कि वहां पर वकील भी विरोध कर रहे हैं। वहां सुनवाई में गवाहों की सुरक्षा का भी मसला हो सकता है। ऐसे में कोर्ट मामले की सुनवाई जम्मू में कठुआ की अदालत से चंडीगढ़ की अदालत स्थानांतरित कर दे।

    हालांकि जयसिंह ने कहा कि इस मामले की जांच से उन्हें कोई शिकायत नहीं है। पुलिस ने बहुत अच्छी जांच की है और कोर्ट में आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। इसलिए वह मामले की जांच स्थानांतरित करने की मांग नहीं कर रहीं हैं।

    जयसिंह ने परिवार को सुरक्षा के साथ ही परिवार की ओर से कोर्ट में पेश हो रही वकील दीपिका सिंह राजावत और केस की पैरोकारी में मदद करने वाले पारिवारिक मित्र तालिब हुसैन को भी सुरक्षा दिए जाने की मांग की। यह भी कहा कि सुरक्षा कर्मी वर्दी में न होकर सादे कपड़ों में साथ रहें।

    इस पर जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से पेश वकील शोएब आलम ने बताया कि पीड़ित परिवार को पहले ही राज्य सरकार ने एक एएसआइ और चार अन्य सशस्त्र सुरक्षाकर्मी दिए हुए हैं। कोर्ट अगर और लोगों के लिए आदेश करता है तो सरकार को उन्हें भी सुरक्षा देने में कोई आपत्ति नहीं है। सुरक्षा कर्मियों के सादे वस्त्र में होने की मांग पर भी राज्य ने आपत्ति नहीं जताई।

    कोर्ट ने नाबालिग अभियुक्त की सुरक्षा की मांग पर राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जहां नाबालिग अभियुक्त रखा गया है, उस किशोर आश्रय गृह की भी नियमों के मुताबिक पर्याप्त सुरक्षा की जाए। कोर्ट इस मामले पर 27 अप्रैल को फिर सुनवाई करेगा।

    सीबीआई जांच की मांग पर कोर्ट ने नहीं किया विचार-

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी थी, जिसमें मामले की जांच सीबीआइ से कराए जाने की मांग की गई थी। इसके अलावा वरिष्ठ वकील भीम सिंह ने स्वयं को जम्मू का बताते हुए कहा कि इस मामले में राज्य सरकार राजनीति कर रही है।

    कोर्ट इस मामले की किसी निष्पक्ष एजेंसी या सीबीआइ से जांच कराए। लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मामले में किसी पीआइएल पर विचार नहीं करेंगे। कोर्ट ने कहा कि अभी उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा पीड़ित परिवार की सुरक्षा का है और वे फिलहाल उसी पर विचार कर रहे हैं।

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