अहमदाबाद। क्‍या समलैंगिकता को फिल्‍म में दिखाना सामजिक बुराई का चित्रण करता है। यह सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। समलैंगिक व्‍यक्‍ित पर समाज में होने वाले भेदभाव का चित्रण करने वाली फिल्‍म को गुजरात सरकार ने टैक्‍स फ्री करने से इंकार कर दिया है।

ऐसे में इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट को यह फैसला करना है कि मूवी को टैक्‍स फ्री किया जाए या नहीं। राज्‍य के कानून के मुताबिक ऐसी टैक्‍स राहत 1 अप्रैल 1997 के बाद गुजराती भाषा में बनी फिल्‍मों को दी जाती है।

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इसके अलावा बुरी प्रथाओं, अंधभक्‍ित, सती प्रथा, दहेज और अन्‍य सामाजिक बुराइयों आदि का चित्रण करने वाली फिल्‍मों को टैक्‍स फ्री नहीं किया जाता है।

राज्‍य सरकार ने वर्ष 2013 में बनी मेघधनुष - द कलर ऑफ लाइफ को इस आधार पर कर राहत देने से इंकार कर दिया कि इसमें विवादास्‍पद मुद्दे समलैंगिकता को दिखाया गया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि सेंसर बोर्ड ने फिल्‍म को एडल्‍ट सर्टिफिकेट दिया है।

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वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक सेक्स पर प्रतिबंध लगाने वाले औपनिवेशिक कालीन कानून को देश में बहाल रहने दिया और इसके लिए कानून बनाने के लिए संसद को कहा। अदालत के इस फैसले से मानव अधिकार समूह चकित रह गए।