जम्मू। कश्मीर के आईएएस अधिकारी शाह फैसल के इस्तीफे पर प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आमने-सामने आ गए हैं।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि फैसल ने अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए त्यागपत्र दिया है। ऐसे कई अधिकारी होते हैं, जो चुनाव से पहले उनकी विचारधारा को सूट करने वाली ऐसी राजनीति पार्टी तलाशते हैं जो उन्हें मंत्री बना सकती है।

केंद्रीय मंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए उमर ने सोशल साइट पर लिखा, फैसल के पिता को आतंकियों ने मारा था। उमर ने लिखा कि आतंकवाद और हिसा से कश्मीर व इसके लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा है, यह फैसल से बेहतर कोई नहीं जानता।

इससे पहले गुरुवार को जम्मू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि फैसल का इस्तीफा देना एक सामान्य बात है। सिंह ने कहा कि उन्होंने भी ऐसे ही हालात में सरकार नौकरी से त्यागपत्र दिया था। अलबत्ता, उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मैं राजनीतिक पार्टी में शामिल हुआ था तो उस समय सत्ता में आने के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं था। जितेंद्र सिंह ने कहा कि फैसल का इस्तीफा मजबूत इरादों में कमी का संकेत है।

जितेंद्र सिंह ने कहा, अगर खुद पर भरोसा हो तो आपको आतंकवाद का विरोध करना चाहिए। शाह फैसल द्वारा अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जा दिए जाने के आरोपों को नकारते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि मोदी सरकार सभी से इंसाफ कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से जम्मू कश्मीर को पूरा महत्व मिला, अस्सी हजार करोड़ रुपये का पैकेज दिया जाना यह साबित करता है।

केंद्र सरकार का ट्रिपल तलाक बिल बनाना, इसका सुबूत है कि देश में अल्पसंख्यकों को पूरा ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश को एक सॉफ्ट टारगेट मानते हैं। लेकिन यह सहिष्णुता ही है जो सबको अभिव्यक्ति की आजादी देती है।