नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन कर लिया है। शनिवार को अखिलेश यादव और मायावती ने इसका औपचारिक ऐलान किया। इस गठबंधन के एनडीए में हलचल मच गई है। एनडीए में भाजपा की सहयोगी पार्टी लोजपा ने पहली प्रतिक्रिया दी है। लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के बेट चिराग पासवान ने कहा है कि चुनावी रणनीति से बसपा-सपा गठबंधन एक मजबूत गठबंधन है। चुनौती देने के लिए एनडीए को भी अपना कुनबा मजबूत करना चाहिए ताकि यूपी की जनता ऐसे गठबंधन को मुँहतोड़ जवाब दे सके।

भ्रष्ट, जातिवादी और मौकापरस्तों का है यह गठबंधन : योगी

इस बीच, बसपा और सपा गठबंधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यह जातिवादी, भ्रष्टाचारी और मौकापरस्त लोगों का गठबंधन है। सपा और बसपा का विकास और सुशासन से कोई लेना-देना नहीं है। जनता इनके नापाक गठबंधन के बारे में सब कुछ जानती है। समय आने पर वही इनको सही जवाब भी देगी।

ममता ने किया सपा-बसपा महागठबंधन का स्वागत

तृणमूल प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सपा-बसपा महागठबंधन का स्वागत किया है। उन्होंने ट्वीट किया, मैं आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन का स्वागत करती हूं।

जानिए सपा-बसपा गठबंधन की खास बातें

- शनिवार को लखनऊ के ताज होटल में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा चीफ मायावती ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अपने गठबंधन की घोषणा की। इस गठबंधन से दोनों दलों ने कांग्रेस को दूर ही रखा है।

- बसपा प्रमुख मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि हमने आने वाले लोकसभा चुनाव में एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हमने यह फैसला 25 साल पहले राज्य में हुए गेस्ट हाउस कांड को भूलते हुए लिया है।

- इस गठबंधन के बाद सपा और बसपा दोनों ही 80 में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। वहीं रायबरेली और अमेठी की दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी गईं हैं।

- मायावती ने कहा कि उपचुनावों में भाजपा को हराकर हमने रोकने की शुरुआत कर दी थी। इस चुनाव में तो कांग्रेस के उम्मीदवार की तो जमानत ज़ब्त हो गई थी। इसके बाद चर्चा शुरू हुई कि सपा बसपा साथ आ जाएं तो भाजपा को सत्ता में आने से रोका जा सकता है। दलितों, पिछड़ों, गरीबों, धार्मिक अल्पसंख्यक के हितों की उपेक्षा को देखते हुए गेस्ट हाउस कांड को किनारे करते हुए हमने गठबंधन का फैसला किया।

- कांग्रेस के राज में घोषित इमरजेंसी थी और अब अघोषित। सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर प्रभावी विरोधियों के खिलाफ गड़े मुकदमे उखाड़ कर परेशान कर रहे हैं। कांग्रेस के साथ सपा बसपा गठबंधन का कोई खास फायदा नहीं होता। हमारे वोट तो ट्रासंफर हो जाता है लेकिन कांग्रेस का वोट ट्रान्सफ़र नहीं होता या अंदरूनी रणनीति के तहत कहीं और करा दिया जाता है। इसमें हमारी जैसी ईमानदार पार्टी का वोट घट जाता है। 96 में हमारे लिए कड़वा अनुभव था।

- 1993 में सपा बसपा का वोट ईमानदारी से ट्रांसफर हुआ था इसलिये गठबंधन कोई हर्ज नहीं है। अगर भाजपा ने पुर्व की तरह ईवीएम में गड़बड़ी नहीं की और राम मंदिर जैसे मुद्दों से धार्मिक भावनाओं को नहीं भड़काया तो बीजेपी एन्ड कंपनी को हम जरूर सत्ता में आने से रोकेंगे।