हैदराबाद। हैदराबाद की मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में फैसला सुनाने वाले स्पेशल एनआईए कोर्ट के जज रविंदर रेड्डी ने कुछ देर पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जज रविंदर रेड्डी इस्तीफा देने के बाद छुट्टियों पर चले गए हैं। हालांकि उनके इस्तीफा देने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।

रेड्डी ने अपने इस्तीफे के लिए निजी कारणों का हवाला दिया और कहा कि इसका आज के फैसले से कोई लेना देना नहीं है। अधिकारी ने बताया कि दरअसल वह काफी समय से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे थे।

ज्ञात हो कि मक्का मस्जिद विस्फोट केस में हैदराबाद के नामपल्ली की कोर्ट ने असीमानंद समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने यह फैसला एनआईए द्वारा पेश किए गए सबूतों के अभाव में दिया।

गौरतलब है कि 18 मई 2008 को जुम्मे की नमाज के दौरान ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हो गए थे।

इस मामले में 10 आरोपी थे जिनमें से एक की मौत हो गई थी। बाद में 5 लोगों के खिलाफ केस चलता रहा जिनमें असीमानंद भी शामिल थे। इस केस की सुनवाई के दौरान 160 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। एनआईए ने 2011 में इस केस की जांच अपने हाथ में ली थी।

एनआईए मामलों की चतुर्थ अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्र अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली है। इसने पिछले सप्ताह फैसले की सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी थी। स्थानीय पुलिस की शुरुआती छानबीन के बाद मामला सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था। सीबीआई ने आरोपपत्र भी दाखिल किया। इसके बाद 2011 में सीबीआइ से यह मामला एनआइए को सौंप दिया गया।

कानूनी विमर्श के बाद लिया जाएगा अपील का फैसला : NIA-

मक्का मस्जिद धमाके में सभी आरोपितों के बरी होने के मामले में एनआइए ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। एनआइए का कहना है कि अदालत के फैसले की प्रति मिलने और उस पर कानूनी विचार-विमर्श के बाद ही इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील का निर्णय लिया जाएगा।

एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम हाई कोर्ट में अपील की संभावना को नकार नहीं रहे हैं। लेकिन अदालत के फैसले की प्रति मिले बिना इस पर निर्णय नहीं लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक कानूनी प्रक्रिया है। फैसले की प्रति मिलने के बाद कानूनी विशेषज्ञों से इस पर राय ली जाएगी। यदि अदालत के फैसले में कोई कमी नजर आई, तो हम निश्चित रूप से हाई कोर्ट में अपील करेंगे।

वैसे उन्होंने मक्का मस्जिद धमाके की जांच के बारे में कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि जांच के दौरान हमें जो भी सुबूत मिले, उन्हें अदालत के सामने पेश कर दिया गया। अब देखना यह है कि किन आधारों पर अदालत ने उन सुबूतों को मानने से इन्कार किया है।