नई दिल्ली। ताज महल पर मालिकाना हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच विवाद चल रहा है। इस पर मालिकाना हक जताते हुए उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बीते मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि खुद मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में इसका वक्फनामा किया था।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सबूत के तौर पर शाहजहां के दस्तखत वाले दस्तावेज एक हफ्ते में दिखाने को कहा था। मगर, अब बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बोर्ड के पास ताजमहल के मालिकाना हक को लेकर कोई दस्तावेज नहीं है। उसके पास मुगल सम्राट शाहजहां के वंशजों के हस्ताक्षर वाला कोई दस्तावेज भी नहीं है, जिससे साबित हो कि ताज महल पर वक्फ बोर्ड का अधिकार है। मगर, लगातार इसके बोर्ड की संपत्ति की तरह इस्तेमाल को लेकर इसे बोर्ड की संपत्ति माना जा सकता है।

बोर्ड ने कहा कि कोई भी मानव ताजमहल का मालिकाना हक नहीं जता सकता, ये ऑलमाइटी (खुदा) की संपत्ति है। हम मालिकाना हक नहीं मांग रहे हैं। हम सिर्फ ताजमहल के रखरखाव का हक मांग रहे हैं।

वक्फ बोर्ड ने कहा कि फतेहपुर सीकरी में जहां मस्जिद है, वह हिस्सा भी बोर्ड के पास है और आस-पास का हिस्सा एएसआई के पास है। वहीं, कोर्ट में एएसआई ने इसका विरोध किया है और कहा कि अगर ताजमहल का वक्फ बोर्ड को हक दिया गया, तो वह परेशानी पैदा करेगा।

आने वाले दिनों में वह लाल किला और फतेहपुर सीकरी को लेकर भी हक मांगेंगे। इस मामले की अंतिम सुनवाई 27 जुलाई को होगी। गौरतलब है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताज महल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था।

इसके खिलाफ एएसआई ने साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था। बता दें कि वक्फ का मतलब किसी मुस्लिम द्वारा धार्मिक, शैक्षणिक या चैरिटी के लिए जमीन का दान देना होता है।

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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि भारत में कौन यकीन करेगा कि ताज महल वक्फ बोर्ड का है? ऐसे मसलों पर सुप्रीम कोर्ट का वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने कहा कि मुगलकाल का अंत होने के साथ ही ताज महल समेत अन्य ऐतिहासिक इमारतें ब्रिटिशों को हस्तांतरित हो गई थी। आजादी के बाद से यह स्मारक सरकार के पास है और एएसअाई इसकी देखभाल कर रहा है।

बोर्ड की ओर से पेश एडवोकेट वीवी गिरी ने कहा कि बोर्ड के पक्ष में शाहजहां ने ही ताज महल का वक्फनामा तैयार करवाया था। इस पर बेंच ने तुरंत कहा कि आप हमें शाहजहां के दस्तखत वाले दस्तावेज दिखाएं। गिरी के आग्रह पर कोर्ट ने एक हफ्ते की मोहलत दे दी।

एएसआई की ओर से पेश वकील एडीएन राव ने कहा कि कोई वक्फनामा नहीं है। साल 1858 की घोषणा के तहत, अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्ति ब्रिटिश शासन के अधीन हो गई थी। इसके बाद 1948 के अधिनियम द्वारा इमारतों को भारत सरकार ने ले लिया था।

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