नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किशोर को फांसी की सजा नहीं दी जा सकती है। किशोर दो बच्चों सहित सात लोगों की हत्या का दोषी है। और वह पिछले 24 साल से जेल में बंद है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई और कहा कि उसको अभी तक फांसी की सजा इस लिए नहीं दी गई क्योंकि अपराध के समय वह किशोर था।

दोषी को 1994 में गिरफ्तार किया गया था। पिछले दो दशक में निचली अदालत से लेकर राष्ट्रपति से माफी मांगने तक का कानूनी उपचार मुहैया कराया गया। शीर्ष कोर्ट के निर्देश पर पुणे के प्रिसिंपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश की रिपोर्ट से स्थिति बदल गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल दहला देने वाले अपराध को अंजाम देते समय वह सिर्फ 12 साल का था। जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने जेल में बंद दोषी को सात दिनों का पेरोल मंजूर कर लिया। उसे अपने पिता के अंतिम संस्कार में भाग लेने की अनुमति दी है। साथ ही पीठ ने निर्देश दिया है कि रिपोर्ट पर जुलाई में तीन न्यायाधीशों की पीठ विचार करेगी।